वृक्षमंदिर के दो वर्ष

मैंने लिखना बहुत देर से शुरू किया।

पहले लिखा करता था कभी कभी कुछ गद्य और पद्य, कुछ तुक बंदी वाले और अतुकांत भी। अक्सर फाड़ कर फेंक दिया करता था ।नब्बे के दशक में लिखे कुछ पन्ने मिले ।जब उनको पढ़ता हूँ तो कभी तो अंतर्मन को छू जाते हैं और कभी कभी तो लगते हैं एकदम नीरस और उबाऊ। पर हैं तो स्वरचित । अपने हैं सो सम्मान के हक़दार भी हैं , उन लिखे पन्नों को और आज कल के फुरसत से भरपूर दिनों में जो लिख पाता हूँ उसी सब को यहाँ संकलित करने का यह “पूर्णत: स्वांत: सुखाय” प्रयास भर था।

ध्यान दें ”था” ! पर अब ? 

वृक्षमंदिर पर शुरू में तो केवल अंग्रेज़ी के लेख होते थे पर आगे चल कर हिंदी में में लिखा जाने लगा। 

हिंदी में लिखने वालों में यहाँ रश्मि कांत नागर और मनुबंश का विशेष उल्लेख आवश्यक है। नागर और मनुबंश दोनो ने मेरा साथ दिया और वृक्षमंदिर पर अंग्रेज़ी में रंगरेजी तो की ही, पर हिंदी में भी रंग जमाया। दोनों को स्नेहपूर्ण धन्यवाद!

कोरोना काल मे साथ छोडने वालों मे मनुबंश के वृक्षमंदिर के लिये लिखे गये लेख उनकी याद हमेशा दिलाते रहेंगे ।

अंग्रेज़ी में लिखने वालों की सूची तो लंबी है । कुछ नाम याद आ रहे हैं;

रश्मिकांत नागर, डाक्टर एम पी जी कुरुप, जी राजन, अरुन वायंगायेंकर, डाक्टर एस सी मलहोत्रा,

डाक्टर भीम शंकर मनुबंश, प्रकाश ( पी टी जेकब), डी वी घानेकर, शेखर राय, शुभ्रा राय, नरसिम्हा नक्षत्री,

अरूप मित्रा, डाक्टर मुकुंद नवरे, डाक्टर रघु चट्टोपाध्याय, डाक्टर एच बी जोशी, डाक्टर ई माधवन,

ओपी टंडन अमीन खान राहुत, डाक्टर वीपी सिंह, नागेंद्र प्रसाद दोनाकोंडा, नीला गुप्ता, जी कृश्नन,

एम एम पटेल, डाक्टर दीपांकर चट्टोपाध्याय, मधुसूदन मानवी, अजय गुप्ता, दुष्यंत मिश्र,

जनमेजय वैश्नव, डाक्टर/डी सी शाह , दिनेश कुमार सिंह, गिरीश यादव, रीना शिमोगा,

डाक्टर आइवीएनएस राजू, डाक्टर आर पी अनेजा और मेरे एक मित्र जिन्होने अपना नाम जग ज़ाहिर न कर “एनानिमस” बन कर लिखा । हर एक को हृदय से धन्यवाद !

सर्च सुविधा का उपयोग करें और रोमन लिपि मे इनके नाम लिख कर सर्च करें तब इनके लिखे लेखों की सूची निकल आयेगी।

जैसे जैसे और नाम याद आयेंगे जोड़ता जाऊँगा ।l

अंग्रेज़ी में लिखने वाले दो और मित्रों का उल्लेख करना चाहूँगा

दोनो एनडीडीबी के पूर्व कर्मचारी नहीं हैं । आर गणेश या गणेश जी बहुत देर से मिले मेरे एनडीडीबी छोडने के बाद । हम दोनों बीसवीं सदी जन्मे पर मिलने का संयोग बन पाया इक्कीसवीं सदी मे । पर जब मिले तो ऐसे मिले जैसे हम एक दूसरे को बहुत समय से जानते हों !

दूसरा नाम है “सनीचर” ( छद्मनाम) जो मेरे ट्विटर मित्र हैं और राग दरबारी के पात्र सनीचर के नाम से ट्वीट करते हैं ।

डाक्टर एच बी जोशी ने गुजराती मे भी लिखा है। डाक्टर नवरे ने मुझे अपना एक मराठी मे लिखा लेख भेजा है जिसका अंग्रेजी अनुवाद कर शीघ्र ही प्रकाशित करूंगा।

विनीता ( मेरे पूर्व सहकर्मी स्वर्गीय डाक्टर सत्य प्रकाश मित्तल की पुत्री ) अंग्रेजी काव्य लिखने वाले भारतीयों मे जाना माना नाम है । विनीता की एक कविता का हिंदी अनुवाद अब वृक्षमंदिर पर है।शीघ्र ही विनीता की कुछ और अंग्रेज़ी कविताओं का हिंदी अनुवाद वृक्षमंदिर पर प्रकाशित होगा।

इंडियन इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेट अहमदाबाद के भूतपूर्व डायरेक्टर, डाक्टर प्रदीप खांडवाला ने मैनेजमेट, इनोवेशन और क्रियेटिविटीपर बहुत सी किताबें लिखी हैं।उनके अंग्रेजी और गुजराती मे लिखे कविता संग्रह भी प्रकाशित हुये हैं।

डाक्टर खांडवाला की एक अंग्रेजी मे लिखी कविता का हिंदी अनुवाद भी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित हुआ है ।

आशा है आगे चल कर और मित्र भी हिंदी या किसी भी भारतीय भाषा में वृक्षमंदिर के लिये लिखेंगे ।

आप की प्रतिक्रिया, आलोचना, सराहना सब का स्वागत है ।कोई भी ब्लाग यदि अच्छा लगे तो कृपया उसे लाइक करिये ।

अपने विचार कमेंट्स के लिये दिये गये प्रकोष्ठ में अथवा sk@vrikshamandir.com पर ई मेल द्वारा साझा करें ।

नीचे दिये गये हैं कुछ हिंदी मे प्रकाशित लेखों के लिंक ।

एक दुपहरी

समय है हमारी बूढ़ी माँ

जिजीविषा

जिजीविषा और आकांक्षा की बैसाखी पर चलती यह ज़िंदगी

बच्चे बादलों के

दुआ

चार दोहे और ज़िंदगी

तैरने वाला समाज डूब रहा है

चर्चा फ़िराक़ गोरखपुरी की

कहाँ गये वह दिन

मनुबंश और शैलेंद्र के पत्राचार से बनी कहानी

स्कूटर जानदार सफ़र शानदार

फ्यूज़ बल्ब – एक कहानी

विभीषण

राम सेतु

हम विकास चाहते हैं

अगर लोहा न होता

आस्था भेद और व्यावहारिक जीवन दृष्टि; एक संवाद

दीपक सुचदे जी (बाबा) अब न रहे

भारत में पत्रकारिता

कोरोना टाइम्स

शब्दों का घालमेल और उसकी परिणति

अखाड़ा से व्यायामशाला तक का सफ़र

हिंदू घरों और मंदिरों में देवी देवताओं के चित्र और मूर्तियाँ क्यों है

अम्मा की निमोना बनाने की विधि

सहज मानवता स्नेहिल आतिथ्य

भारतीयता की तलाश