मनुबंश और शैलेन्द्र के पत्राचार से बनी कहानी

साझी कहानिया

श्रद्धेय महाशय,

प्रातः वंदन  !  

श्री मान, मेरी तीन कहानियाँ आपके पास लम्बित है l इनका विवरण निम्नवत है : –

1) बरौनी डेयरी मे हुए strike से सम्बंधित, इसका शीर्षक नही दिया गया है 

2) NDDB Coordinator से संबंधित कहानी जो फाइनल स्टेज मे है l

3) ” स्टोरी ऑफ एन इनफरटाइल काव “

कृप्या उपरोक्त विवरणों पर ध्यान देना   चाहेंगे l

सादर 🙏🙏🙏

भीमशंकर


प्रिय भीमशंकर जी, 

तीनों जनी हमरे लगे आ गइल बाँटी । कुछ दिन से  घरे के कामे  में अइसन अंझुरइलीं कि  बेव साइट पर ओतना ध्यान नाही दे पावत हईं कि जेतना देवे के चाहीं। एक दुई दिन में हालत  पहिले के तरियन  हो जाई  ।ज़रूरी  कार्रवाई भी हो जाई। 

अउर तीनों जनी अपने थाने पराने इंटरनेट लोक में वृक्षमंदिर पर विराजमान हो जइहें  । 

धन्यवाद

शैलेंद्र 


राउर के लिखल हमार समझ मे आ गइल बाl आपन बोली मे लिखल राउर के चिट्ठी पढ के बहुते निम्मन लागल l राउर घर के काम काज पहले निबटा लिहिं l कहनिया ते देर सवेर छपइबे करी l

हमार प्रणाम स्वीकार करीं

धन्यवाद

भीमशंकर


अरे कइसी रउरे समझ में  नाही आई ? भोजपुरिये में ते लिखले रहलीं न ? तनी मनी फरक ते होला गोरखपुर अउर  पटना में बोले वाली भोजपुरी में । 

आजु NDDB Coordinator वाला आप के लेखवा जंबूद्वीप भारत खंड से इंटरनेट लोक, वृक्षमंदिर द्वीप पर पहुँच गइल। 

उहाँ जइले के रस्ता निचवां लिखल  लिंकवा   के उँगली कइले  पर मिलि जाई। 

 सस्नेह, 

शैलेंद्र 

https://vrikshamandir.com/2020/06/11/nddb-state-coordinator-a-panacea-for-all-ills/


धन्यवाद सर जी l हमार बोली त मैथिली बा लेकिन भोजपुरियो तनी मनी बोल लेत बानी l राउर भोजपुरी मे लिखले रहीं त हमहु उहे बोली मे जवाब भेज देलिं l

एक बात अउर, इ हमार तेसर नाहीं चौथा कहानी रहे l एगो के याद शायद रऊआ भुला गइल बानी l उ छोट सन कहानी रहे सर्वे बाला जे राजीव गांधी करैले रहन l अब जाइ दी l केतना याद राखब l और दु गो बाचल बा l जब मौका लागि त देख लेल जाई l कोय   हडबडी नइखे l अब इ चिठिया बंद कर देत 

बानी l

राम राम औ परनाम l

भीमशंकर


हम अब बुढ़ा गइलीं अरे ए मनुबंश बाबू !

 लगला एही से से भुला गइलीं  कि इहो चढ़ गइल बाटी इंटरनेट लोक के वृक्षमंदिर द्वीप पर । 

https://vrikshamandir.com/2020/05/22/what-percentage-of-the-funds-spent-by-the-government-for-the-poor-the-actually-reaches-the-poor/

मैथिली हम कुछ कुछ समझ जाइब । 

Barauni Dairy Feasibility Study हमार पहिला फ़ील्ड प्राजेक्ट रहे । हम 1969 में माइकल हाल्स के साथे बिहार गइल रहलीं । डाक्टर अनेजा ओही साल एनडीडीबी ज्वाइन कइले रहले। माइक के साथे हम पटना, बरौनी, खगडिया, मुंगेर, दरभंगा और बहुत से गांवन में गइल रहलीं। बड़का बनर्जी साहेब तब बिहार डेयरी डिपार्टमेंट में काम करत रहले। एक जनी “प्रसाद” बाबू रहें । तिसरा  जनी के नांव शायद सच्चिदा बाबू रहे।हमार काम डेटा इकट्ठा कइले अउर माइक के ट्रासलेटर बने के रहे ।महरमंडल मे  बड़ा खरमंडल हो जा कब्बों कब्बों । माइक सरसट सरसर फटाफट अंग्रेज़ी बोले अउर तब हमार अंग्रेज़ी भी गोरखपुरिये रहे । जब समझी नाही तब अगरेजी के रंगरेजी कइ डाली। 

ख़ैर बरौनी डेयरी के निर्माण ते ओह फिजीबिलिटी स्टडी पर नाही भइल । 

पर एनडीडीबी के अवसर मिलल फिजिबिलिटी स्टडी के प्रोटोटाइप बनउले में। आपरेशन फ़्लड के प्लांनिग में बहुत काम आइल। 

माइक बड़ा जीवठ  वाला अदिमी रहलें । अंग्रेज होखले पर भी एक भारतवासी से ज़्यादा  भारतीय ! उनके बारे मे अउर लिखे के चाहीं । डाक्टर कुरियन के सोचके डाकुमेंट कइले मे उनकर बहुत बड़ा हाथ रहे । 

बरौनी डेरी के बनल 1969 के बहुत बाद  मे अउर उहाँ कोआपरेटिव यूनियन भी बनल । ख़ुशी के बाति ई है कि आप ओह बरौनी यूनियन के एमडी बनि के बहुत दिन सेवा कइली । 

सस्नेह ,

शैलेंद्र

पुनश्च: आपके ” स्टोरी ऑफ एन इनफरटाइल काव” हमारे लगे नाहीं मिलता। फिर से भेजीं ।


श्री मान जी,

हमार प्रातः वंदन रऊआ स्वीकार करीं l 1969 मे आपन सब जे बरौनी विजिट कईले रहलिं से जनले बडा नीक लागल l रऊआ जनले खुश होइब कि अप्पन देश के पहिला राष्ट्रपति स्व•डा• राजेन्द्र प्रसाद जी सन् 1952 के 26 दिसम्बर के” ग्रामीण मक्खन शाला ” के नींव रखले रहलिं l

ई उहे जगह बा जहाँ बाद मे बरौनी डेयरी खडा कईल गईल l हम जब 1992 मे आईल रहलिं तब संस्था के नाम ” खगडिया-बेगूसराय-बरौनी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि•” रहे l

बोल – चाल मे एकरा ख•बे•ब• बोलल जात रहे l ई सुनला हमरा बहुते खराब लागल l एहे खातिर अगला AGM मे हमनी नामे बदलबा देलिं l नया नाम सीधा ” बरौनी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि•” राखल गइल l लेकिन हमरा बाद मे रिअलाइज भइल कि महा महिम के नींव डालल अढाई हजार किलो क्षमता के मक्खनशाला अब हेतना बड़ डेयरी बन गईल बा l ईहै खातिर अब बरौनी डेयरी के नाम महामहिम के नाम पर राखल जाइ त उ महान आत्मा के प्रति हमार सब के आभार – कृतज्ञता ज्ञापित हो सके l उहे भइल l

अगला AGM मे नाम बदले के प्रस्ताव फिरो एक बार राखल गइल l इ प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार कईल गेल l नया नाम ” देशरत्न डा• राजेन्द्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि•” राखल गईल l

अब नामो के प्रभाव जान लेल जाओ l 1952 के अढाई हजार और 1992 मे जहाँ 25 – 30 हजार लिटर मात्र दूध के संग्रहण एक दिन मे होत रहे, 2006 मे जब हमरा रिटाइर हुए वाला रहलिं तब दूध के संग्रहण बढ के 3,00,000 (तीन लाख) लिटर रोज के हो गइल रहे l रऊआ इ जान के औरो खुश हो जाईब कि इहे बरौनी डेयरी के एक दिन के दूध कलेक्शन 7,00,000 (सात लाख लिटर) के ऊंचाई तक पहुँच गइल ह l


” जय सहकारिता – जय आणन्द पद्धति – जय कुरियन बाबा ” 🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अब इ बाला एपिसोड हम बंद करत बानी l

एक बात अउर,” पत्राचार से कहानी ” हम पीके सर यानि पी के सिन्हा सर के भेजले रहीं, उनका खूब निम्मन लागल l
राउर के फिरो हमार परनाम
शुभेक्षु
भीमशंकर


1 thought on “मनुबंश और शैलेन्द्र के पत्राचार से बनी कहानी”

  1. Dr SC Malhotra

    चगींयां गप्पां मार लेंदें हो तुस्सी ।। वाह भाई वाह ।।

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