ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाट्सएप विश्वविद्यालय से साभार


ठीक ही कहा है आजकल बुढ़ापा झेल रहे मानव को फ़ेसबुक और व्हाट्सएप भी बड़ा सहारा देते हैं । कुछ समय ट्विटर पर भी निकला जा सकता है। टीवी पर समाचार देखना बहुत कम हो गया क्योंकि समाचार नहीं एंकरों के सदविचार और दुर्विचार ही देखने को मिलते हैं ।

परिवार और मित्र कोई यहाँ कोई वहाँ । यहाँ हो कर भी मिलना मुश्किल है । बहुत कुछ डिजिटल हो रहा है।ज़ाहिर है ऐसे में ट्विटर, फ़ेसबुक और व्हाटसएप का ही सहारा है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों अपने ही देश सरकार को आँख दिखा सकती हैं। ट्रंप साहब का ट्विटर अकाउंट आख़िर ट्विटर के मालिक जैक जी की तथाकथित समाजवादी विचारधारा के चलते जीवन पर्यंत तक के लिये हटा दिया गया । भला हो इन कंपनियों का । हमारे भारत और दुनिया के बहुतायत देशों में जनता जनार्दन को बतकही करने की सुविधा प्रदान कर रखी है। मुफ़्त में नहीं आख़िर पैसा तो कमाना ही है और पैसा एक हाथ से दूसरे हाथ न सरके तो आर्थिक प्रक्रिया ठंढे बस्ते में चली जायेगी और विकास की आँख मिचौली भी बंद हो जायेगी। बड़ी बातें तो बहुत सी हैं पर बड़ी बड़ी बातों में बड़ी बात यह है कि भारत का कम्युनिस्ट, समाजवादी, कम्युनेलिस्ट , दंक्षिण पंथी, वाम पंथी, निठ्ठले , संभ्रांत, धनी, धन पिपासु, गाँव गवईं के आम जन… सबको समान रूप से उपलब्ध है। जेब में पैसा होना चाहिये। किसी जनसेवक राजनीतिक पार्टी के ट्रोल बन पैसा कमा सकना , देश के विकास में भागीदार होना साथ में मनोरंजन करना सब संभव है।

बुढ़ापे में बाल बच्चों के अलावा अब तो फ़ेसबुक और व्हाट्सएप भी बड़ा सहारा देते हैं।

आनंद लें मेरे द्वार संकलित कुछ पुराने और नये व्हाटसऐपी, ट्विटिराती और फेसबुकिया संवादों का । अच्छा टैम पास है। आपको कहीं से कुछ अच्छा लगता पोस्ट मिले तो मुझसे शेयर करें sk@vrikshamandir.com पर । अगले अंक में उसे सम्मिलित करूँगा और आप के नाम सहित छाप कर धन्यवाद 🙏🏼 भी दूँगा।





Published by Vrikshamandir

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