राजनीति और राजनीतिज्ञ


जातिगत, धर्मगत, क्षेत्रगत, वर्गगत

असंतुष्टि से तुष्टि, तुष्टि से तृप्ति

लोलकों की डंडियां

डोलती हैं इधर से उधर, उधर से इधर

वास्तविकता से बे- खबर
जनता जो कहलाती है जनार्दन

बे असर, ख़ुश है मूर्ख बन कर

राजनीतिज्ञ खोले अपने केश गुच्छ

खुजलाते हैं खभर खभर


Published by Vrikshamandir

A novice blogger who likes to read and write and share

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