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Panchvati July 2019

वृक्षमंदिर

Life has a “life” of it’s own ! I have already spent nearly three fourth of hundred years on this planet. In retrospect, I reckon that my life has had four phases thus far, each linked to one important place.

– Chatur Banduari, Gorakhpur ( UP)

– Anand, The Milk Capital of India ( Gujarat)

– Gurugram, The Millennium City (Haryana)

– Wherever and no where !

This initiative started as an attempt to write memoirs but over time it has become much more than that. Dedicated to stories and conversations on human development, culture and tradition.

This initiative has been possible because of love, affection and support of my former colleagues and friends.

जीवन का एक अपना ही “जीवन” होता है ।मौसमों की भाँति जीवन के भी कई चरण, अवस्थायें तथा स्थितियाँ होती हैं। मैं अब तक सौ साल के लगभग तीन चौथाई साल पृथ्वी पर जी चुका हूँ । बीते दिनों पर सिंहावलोकन करूँ तो मुझे लगता है मेरा अब तक का जिया जीवन चार चरणों में बंटा जान पड़ता है।हर चरण किसी स्थान विशेष से जुड़ा रहा है।

– चतुर बंदुआरी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

– आणंद, गुजरात, भारत की दूध राजधानी

– गुड़गाँव, हरियाणा, भारत का सहस्राब्दी नगर

– कहीं भी कहीं भी नहीं I

प्रारंभ में इस प्रयास का ध्येय तो केवल अपने संस्मरण लिखने का था, पर कालांतर में इसका स्वरूप बदला और अब भी बदल रहा है।

आभार

मानव विकास, संस्कृति और संवाद के प्रति समर्पित यह प्रयास मेरे प्रिय मित्रों और स्नेही जनों के सहयोग से ही संभव हो सका है


कुछ इधर की कुछ उधर की कुछ आपकी कुछ मेरी कुछ सबकी

From here and there


Paper from Vrikshamamdir
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