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Poetry Satire

खलबली

खलबली अचानक एक दिन मच गई शरीर के तंत्रो मे अजब सी खलबली , हम में से है बडा कौन, इस गंभीर मुद्दे पर अति उग्रता से बहुत बातें चली । सुनो, जीभ बोल पड़ी, “मैं सब से बडी” , “बिना स्वाद सब एक नमकीन हो या रबड़ी”, अन्न नली ने कहा चल हट, तेरा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry Uncategorized

ईशोपनिषद

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पृथ्वी सौंदर्य – पृथ्वी प्रकोप

कल खेल में हम हों न हों नीला आकाश रहेगा सदा झिलमिल सितारे रहेंगे सदा सूरज जग रोशन करेगा सदा जलचर जल क्रीड़ा करेंगे सदा नभचर कलरव करेंगे सदा थलचरों की नाद गूंजेगी सदा कल खेल में हम हों न हों बाढ़ आँधी नाश करेंगे सदा ज्वालामुखी क़हर ढायेंगे सदा बवंडर घरों को गिरायेंगे सदा […]