98 की उम्र में आ चुका हूँ और अभी भी जितना कमाता था उससे ज़्यादा कमा रहा हूँ, लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं ये कैसे करता हूँ। वे मुझे लंबी उम्र का एक्सपर्ट मानते हैं। मैंने इस विषय पर पहले भी कुछ कहा था; अब पिछले दो साल के अपने अनुभव के आधार पर […]
Category: समसामयिक
While in Gurgaon we live in a flat — or what the westerners call an apartment — in a multi-storey middle-class gated community having five towers in Sector 52, Gurgaon, not far from Huda Metro station. Life here is usually peaceful and routine despite the residents, RWA and builder engaging in never-ending disputes. But middle-class […]
मेरी मर्जी
एक नए युग की शुरुआत तब हुई जब सोशल मिडिया जन जन तक पहुँच गया । भारत में अस्सी करोड़ लोगों को पाँच किलो हर महीने सरकारी अन्न दान की अद्भुत घोषणा के पहले ही विश्व में सबसे कम से कम दर पर जनता को इंटरनेट की सुविधा देने वाले देशों में भारत अग्रणी है। […]
कुछ दिन पहले मैने “समसामयिक चर्चा” शीर्षक से एक लेख शृंखला आरंभ करने की घोषणा कर पहली कड़ी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित भी कर दी थी । समय हो और मन करे तो इसे पढ़ने के लिये इस लिंक ( समसामयिक चर्चा- १ ) पर उँगली दबायें । कहते हैं न “प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः” । पहले अंक […]
आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ […]
“अनपढ़” बहुत घमंडी है। “पढ़े लिखे” को केवल एक ही बात का घमंड है । वह है “अनपढ़” से ज़्यादा बुद्धिमान होने का। “पढ़ा लिखा अनपढ़” और “अनपढ़ पढ़ा लिखा” कनफुजिआस्टिक स्टेट में विचरण कर रहा है मस्त है !
एक बार फिर स्वागत है , आप सब सुधी और बेसुध जनों का कोरोना टाइम्स पर । हमें विश्वास है कि कोरोना टाइम्स शीघ्र ही जंबू द्वीप के भारत खंड मे मिडिया धुरंधरो के बीच शुध्ध बकवास, और अविश्वासी वाहियात खबरों का एक मात्र स्रोत बन सकेगा। वैसे हमे और न आप में से किसी […]
समतामूलक समाज
समतामूलक (Equitable) समाज का अभिप्राय मेरी समझ से ऐसे आदर्श समाज से है जिसके मूल मे समता हो। दूसरे शब्दों मे ऐसा समाज जिसका अंतर्निहित मूल्य समता हो । समता (equity) और समानता (equality) को लेकर काफ़ी भ्रम है । किसी ने कहा है “Equality is impossible, Equity is possible”! मानव समाज मे सभी एक […]
