होते हुये भी न होना, विकास उर्फ़ विकसवा की व्यथा कथा
लेखक की ओर से: यह व्यथा-कथा पहले दो बार छप चुकी है—जनवरी 2020 में तथा जुलाई 2022 में। अब दोनों को मिला कर, और थोड़ा आगे बढ़ा कर, एक ही स्थान पर रख दिया है। पुरानी पोस्टों की जगह यही नया रूप रहेगा। मानव सभ्यता के कुछ बुद्धिजीवी विशेषज्ञों का मानना है कि “विकास” का…
