मानू अमरोहवी और बंदुआरी के बाबू साहब की हालिया खत-ओ-किताबत
4 March 2025 जनाब अरविंद उर्फ़ मानू अमरोहवी, मन मे एक बात उठी , बहुत देर से उमड़ घुमड़ रही है । वैसे ही जैसे पेट में घुड़ घुड़ होती है हवा निकलने के पहले की तरह, बिलकुल उसी तरह। बात यह है कि मन कह रहा है नीचे लिखे को वृक्षमंदिर पर छेंप दूँ…
