वृक्षमंदिर हिंदी में: कथा, कविता, वार्ता और संवाद
यह आभासी वृक्षमंदिर का हिंदी घर है। यहाँ संस्मरण हैं, कविताएँ हैं, बातचीत और विमर्श हैं — कुछ अपने लिखे, कुछ उन “अपनों” के लिखे जो जीवन की राहों पर में मिले फिर जुड़ गए !
यह आभासी वृक्षमंदिर का हिंदी घर है। यहाँ संस्मरण हैं, कविताएँ हैं, बातचीत और विमर्श हैं — कुछ अपने लिखे, कुछ उन “अपनों” के लिखे जो जीवन की राहों पर में मिले फिर जुड़ गए !
I was watching a YouTube short the other day. Avadh Ojha talking about a liquor bottle caught in school and how his father handled it. Reminded me of an incident in the early 1980s. Babuji was visiting Anand and I was staying in the C-10 flat of NDDB. Anand* for us in those days revolved…
98 की उम्र में आ चुका हूँ और अभी भी जितना कमाता था उससे ज़्यादा कमा रहा हूँ, लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं ये कैसे करता हूँ। वे मुझे लंबी उम्र का एक्सपर्ट मानते हैं। मैंने इस विषय पर पहले भी कुछ कहा था; अब पिछले दो साल के अपने अनुभव के आधार पर…
An architect designs buildings and cities. But this one also writes poems about them. This blog shares three poems—straightforward and honest. They mix the sharp edges of city life with the gentle flow of memories. The poems “Whiplash”, “सूनी राहें” and “आओ तो जरा” bring together busy streets, quiet paths, and everyday feelings. I am…
चेला – गुरू जी बहुतै चिंता हुइ रई है, तबियत भी ठीक नाईं चल रई, कमाई का कोई साधन नही, बैंक में रखे कुछ पैसों के व्याज से घर चल रिया है।सोच सोच कर दम घुटता है। चिंता खाए जा रई है। गुरू- बेटा, चिंता को भुलवाने की कोचिस तो कर के देखो…
एक नए युग की शुरुआत तब हुई जब सोशल मिडिया जन जन तक पहुँच गया । भारत में अस्सी करोड़ लोगों को पाँच किलो हर महीने सरकारी अन्न दान की अद्भुत घोषणा के पहले ही विश्व में सबसे कम से कम दर पर जनता को इंटरनेट की सुविधा देने वाले देशों में भारत अग्रणी है।…
डाक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है;वह “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं। वह एक कुशल कंसलटेंट के रूप में…
हमारे एक बड़े पढ़े लिखे समझदार मित्र हैं। अमरोहा से है। अब डेरा शहर वडोदरा में है। पर वह अमरोहा भूल नहीं पाते। मैं भी आणंद, गुड़गाँव और शहर टोरंटो मे बसर करने के बाद भी बंदुआरी और गोरखपुर भूल नहीं पाता। मेरे दोस्त ने शहर वडोदरा में रहते हुये भी अमरोहा की याद मे…
इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व…
आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ…
मेरे मित्र श्री मनीष भारतीय ने लगभग ग्यारह साल पहले 3 नवंबर 2011 को अपनी फ़ेसबुक वाल पर यह मेसेज पोस्ट किया था। बारह साल बीत गये 2023 आते आते अन्ना, केजरी और भूषण अलग थलग हो गये।लोक पाल जी का बिल न जाने कौन से बिलों में घुसता निकलता निकलता 2013 मे पार्लियामेंट मे…
AI+ यह ब्लाग लगभग संपूर्णत: एआई+ द्वारा लिखा गया है आजकल, इंटरनेट और तकनीकी जमाने में जानकारियाँ आसानी से हमारे पास पहुंचती हैं। हर कोई अपने फोन, कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से जानकारी तक पहुंच सकता है। लेकिन, जानकारी के आधार पर सही समझ बनाना मुश्किल हो रहा है। इसके पीछे कई…