खलबली
खलबली अचानक एक दिन मच गई शरीर के तंत्रो मे अजब सी खलबली , हम में से है बडा कौन, इस गंभीर मुद्दे पर अति उग्रता से बहुत बातें चली । सुनो, जीभ बोल पड़ी, “मैं सब से बडी” , “बिना स्वाद सब एक नमकीन हो या रबड़ी”, अन्न नली ने कहा चल हट, तेरा…
खलबली अचानक एक दिन मच गई शरीर के तंत्रो मे अजब सी खलबली , हम में से है बडा कौन, इस गंभीर मुद्दे पर अति उग्रता से बहुत बातें चली । सुनो, जीभ बोल पड़ी, “मैं सब से बडी” , “बिना स्वाद सब एक नमकीन हो या रबड़ी”, अन्न नली ने कहा चल हट, तेरा…
मैंने एक अमरोहवी दोस्त को लिखा, पेशे ख़िदमत है जौन एलिया के दो शेर, मै भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बसखुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं”चारा साजों की चारा साजी से दर्द बदनाम तो नही होगाहाँ दवा दो पर बतला दो मुझे आराम तो नहीं होगा चारा साज ~…
I follow Rakesh Krishnan Simha (@ByRakeshSimha) on Twitter. I find his tweets informative, incisive and humorous. Rakesh Krishnan Simha (@ByRakeshSimha) posted a long satirical thread of seventeen tweets to highlight the “alleged” and “imagined” “thinking” of some contemporary leaders, thought leaders and influencers. In Khushwant Singh’s style of “malice towards one and all”, he used…
लकड़हारे की यह पुरानी कहानी तो आपने अवश्य सुनी या पढ़ी होगी। जंगल में गहरी नदी किनारे लकड़ी काटते समय हाथ से फिसल कर उसकी कुल्हाड़ी नदी में जा गिरी। जीवन यापन का एकमात्र साधन खोने से दुःखी लकड़हारा गहन चिंता में डूब कर जब रोने लगा तब उसके सामने जलदेवी प्रकट हुई, उसे पहले सोने, फिर चाँदी की कुल्हाड़ियों का प्रलोभन दिया और अंत में, लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न होकर, उसकी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ सोने चाँदी की कुल्हाड़ियों का पुरस्कार देकर उसे हमेशा के लिए दरिद्रता से बाहर निकाल दिया। लकड़हारे ने अपना शेष सम्पन्न जीवन, सपरिवार संतोष से जिया।
Reproducing a slightly edited version of a blog I wrote in December 2019. Vrikshamandir first appeared online in November 2019. That was a time when I was going through a rough patch. I was healthy, yet there was something amiss. Vrikshamandir was an idea and with the help of friends and former colleagues, I was…
एगो कहानी सुनाते हैं, बात तब की है जब हम ओरिजनल काशी वासी थे। एक इंटरव्यू देने गये थे दिल्ली CSIR में, Senior Research Fellow का । ससुरा बोर्डे में मार कर दिए, वो इसलिए कि एगो वैज्ञानिक महोदय जो इंटरव्यू ले रहे थे उन्होंने ये कह दिया की लेड को प्लंबम नहीं कहते हैं…
From the pen of a “pun-ster friend” of Dr. Surendra Ranade The Amul group’s turnover crossing ₹50,000 Cr, is a clear case of the ‘Lactic’ going ga’Lactic’ and creating its own ‘Milk’y Way! Reposting this blog contributed by Dr Surendra Ranade for Vrikshamandir on 10 August 2020. Six years later in 2026 turnover of Amul…
एक बार फिर स्वागत है , आप सब सुधी और बेसुध जनों का कोरोना टाइम्स पर । हमें विश्वास है कि कोरोना टाइम्स शीघ्र ही जंबू द्वीप के भारत खंड मे मिडिया धुरंधरो के बीच शुध्ध बकवास, और अविश्वासी वाहियात खबरों का एक मात्र स्रोत बन सकेगा। वैसे हमे और न आप में से किसी…