पैसा जिसका, ख़बर उसकी
पारंपरिक मीडिया के तीन मुख्य धड़े, सामाजिक मीडिया की अलग दुनिया और सरकार की अपनी सूचना मशीनरी, ये सब मिलकर आज की भारतीय मीडिया की तस्वीर बनाते हैं। और इस तस्वीर में पैसे का स्रोत ही अक्सर यह तय करता है कि कोई किसके साथ खड़ा है। पैसा जिसका, ख़बर उसकी।
