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समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

A Close Call with Fire

While in Gurgaon we live in a flat — or what the westerners call an apartment — in a multi-storey middle-class gated community having five towers in Sector 52, Gurgaon, not far from Huda Metro station. Life here is usually peaceful and routine despite the residents, RWA and builder engaging in never-ending disputes. But middle-class […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion News and Views

Mother Earths Agony धरती माँ की पीड़ा

Dr. K.V. Raju, from the second batch of IRMA, who also taught at IRMA and later became the first Director of the Development Management Institute, Patna, shared a video on WhatsApp a few days ago. He is a dear friend of mine. I hadn’t opened it until today. Please click on this link to watch […]

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Reminiscences Story

एक सत्य कथा

मैंने “महादेव दा का राजनैतिक वध” अपने मित्र श्री मनीष भारतीय के फेसबुक पेज पर पढ़ा था। ऐसी घटनाएं सच जैसी लगती हैं, लेकिन जब तक खुद अनुभव न करें, तो कभी कभी अविश्वसनीय सी भी लगती हैं। मन में सवाल उठता है “क्या सच में ऐसा होता है?” धन्यवाद मनीष का, जिन्हें यह कहानी […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग

गुरु जी कहिन

    चेला – गुरू जी बहुतै चिंता हुइ रई है, तबियत भी ठीक नाईं चल रई, कमाई का कोई साधन नही, बैंक में रखे कुछ पैसों के व्याज से घर चल रिया है।सोच सोच कर दम घुटता है। चिंता खाए जा रई है। गुरू- बेटा, चिंता को भुलवाने की कोचिस तो कर के देखो […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

गोरखनाथ मंदिर परिसर मे नागपंचमी के अवसर पर कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में हर वर्ष नागपंचमी के शुभ अवसर पर कुश्ती का आयोजन परंपरागत रूप से किया जाता है। समय के साथ, मिट्टी के अखाड़े की जगह अब गद्दे ने ले ली है, और पहलवानों को अखाड़े पर घुमा-घुमाकर जोड़ मिलाकर कुश्ती दंगल की जगह प्रतियोगिता का आयोजन किया जाने लगा है। […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

बीता जीवन स्मृतियों का वन

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Story

मानू अमरोहवी और बंदुआरी के बाबू साहब की हालिया खत-ओ-किताबत

4 March 2025 जनाब अरविंद उर्फ़ मानू अमरोहवी,  मन मे एक बात उठी , बहुत देर से उमड़ घुमड़ रही है । वैसे ही  जैसे पेट में घुड़ घुड़ होती है हवा निकलने के पहले की तरह,  बिलकुल उसी तरह।  बात यह है  कि मन कह रहा है नीचे लिखे को वृक्षमंदिर पर छेंप दूँ […]

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Satire

पौष्टिक भोजन लें, कसरत करे, अच्छी नींद लें पर हँसना भी बहुत ज़रूरी है !

साधारणतः मैं ऐसी मनोरंजन सामग्री कुछ ख़ास मित्रों से ही शेयर करता हूँ । पर आज कुछ मूड ऐसा बना कि मैंने अपने आप से कहा क्यों न सबसे साझा करूँ? हर्ज क्या है। लीजिये हाजिर है आज का संकलन ! नेता जी थे, नेता हैं और नेता बने रहेंगे। ज़रूरत पर उनकी कंघी भी […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – १

आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ […]

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व्यंग Culture, Tradition, Human Development and Religion

कलजुग में लोग बड़े बेदर्द , बेमुरव्वत और बेहूदा हो जाते हैं या कलजुग उनसे करवाता है

मेरे मित्र श्री मनीष भारतीय ने लगभग ग्यारह साल पहले 3 नवंबर 2011 को अपनी फ़ेसबुक वाल पर यह मेसेज पोस्ट किया था। बारह साल बीत गये 2023 आते आते अन्ना, केजरी और भूषण अलग थलग हो गये।लोक पाल जी का बिल न जाने कौन से बिलों में घुसता निकलता निकलता 2013 मे पार्लियामेंट मे […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

भगत सिंह, बाबा साहेब अंबेडकर और महात्मा गांधी

इस ब्लाग का लेखन मनीष भारतीय की फ़ेसबुक पर लिखी टिप्पणी से प्रेरित हैमैंने उनके लिखे कई पैरा शब्दशः यहाँ उद्धरित किये हैं। इस लिये हम साझा लेखक हैं ।मनीष से मेरा परिचय,चार या पाँच साल पहले – ठीक से याद नहीं – संभव हुआ, श्री विजय महाजन के सौजन्य से।बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

पढ़े लिखे अनपढ़,कुपढ, और सुपढ़