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Culture, Tradition, Human Development and Religion

Neither Perished Nor Preserved: My Eternal Essence

ना फ़ना मेरी न बका मेरी Dear Friend, You asked me some time ago about improving and deepening the quality of gratitude in your life. I’m sorry I did not respond sooner — I find forgetfulness increases with age. Gratitude (कृतज्ञता) is a quality that distinguishes a human from other animals, though some domesticated animals […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

गोरखनाथ मंदिर परिसर मे नागपंचमी के अवसर पर कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर में हर वर्ष नागपंचमी के शुभ अवसर पर कुश्ती का आयोजन परंपरागत रूप से किया जाता है। समय के साथ, मिट्टी के अखाड़े की जगह अब गद्दे ने ले ली है, और पहलवानों को अखाड़े पर घुमा-घुमाकर जोड़ मिलाकर कुश्ती दंगल की जगह प्रतियोगिता का आयोजन किया जाने लगा है। […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

घुघुआं माना

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

वसुधैव कुटुंबकम

दिग्विजय जी कहते हैं कि “मैं हिंदू हूं, मैं धार्मिक हूं ये मेरा नितांत निजी विषय है। अपने धर्म को मानने का तरीका किसी की परेशानी का सबब नही बनना चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना ही हमारे देश की असली पहचान है” ! जब हमने यह बात शिवपालगंज में सनीचर और लंगड से बताई तो […]

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Poetry Reminiscences

Please Call Me by My True Names

Thanks to my friend Anil Sachdev, I first met Ann Stadler while I was Head of HR in the NDDB. Ann is now in her nineties, and I will be eighty in a couple of years. She is a well-known and highly acclaimed individual. People of my generation would remember the first live program where […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

सभी कथित कवियों से माज़रत

मेरे मित्र मनीष भारतीय ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा “सभी कथित कवियों से माजरत कभी कभी कविताई मुझे मानसिक बीमारी लगती है खासतौर पर जब कोई हर विषय पर चेंप दे” इस संबंध में मनोज झा जी की राज्यसभा में ओम प्रकाश वाल्मीकि जी की कविता पढ़ना क़ाबिले गौर है। झा साहब ने कविता […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

वसुधैव कुटुंबकम; वाक्यांश क्या केवल एक जुमला है ?

एक मित्र ने हाल ही में अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर लिखा: “भारत में पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रणाली को तेजी से एकल परिवार द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों को अस्वीकार किया जा रहा है; सांप्रदायिक झगड़े उग्र होते जा रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में, ‘वसुदैव कुटुंबकम‘ की महान भावना को भारत […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

Performance of Nasadiya Sukta at Times Square today

This performance of Nasadiya Sukta at Times Square today reminded me of the days of Bharat Ek Khoj! I remember our first color TV, Shyam Benegal and his team, Manthan, and so many other incidents and movies. During my Anand days, I was privileged to have met Shri Shyam Benegal, Govind Nihalani, and many others […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

सहिष्णुता, असहिष्णुता, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान

सहिष्णु का विपरीत है असहिष्णु । सहिष्णु वह जिसमें हो सहन करने की क्षमता, जो हो क्षमाशील , जो पीड़ा सहन कर सके आदि । वैसे आधुनिक वैश्विक समाज मे अपेक्षित है कि किसी भी कार्य व्यवहार, बातचीत आदि मे असहिष्णुता न हो। यह आदर्श अच्छा तो लगता है पर क्या वास्तव मे ऐसा है […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry Uncategorized

ईशोपनिषद

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Uncategorized

दिव्य कृपा

यह कहानी जिसे मैं अपनी मां से बचपन मे सुना करता था आज भी याद है! मैंने ये कहानी उनसे पहली बार उस समय सुनी थी, जब मैं कोई पाँच साल का था। उसके बाद ये सिलसिला कोई चार-पाँच वर्ष और चला होगा। पर इस कहानी के बारे में विशेषता ये है, की मैंने ये कहानी हर बार गहरी […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

हमारी जीजी

मेरी माँ को हमने बचपन से इसी नाम से जाना। १९११ में जन्म और २००८ में देवलोक के बीच की भूलोक की उनकी यात्रा ने संघर्ष ही अधिक देखे। ईश्वर में असीमित आस्था और अपने गुरु- जिन्हें उसने ८-९ वर्ष की उम्र के बाद कभी नहीं देखा, की कृपा में अटूट विश्वास ने उन्हें आध्यात्मिकता […]