चिंता, आशा, ममता और मैं

A couple of days ago, my dear friend and former colleague, Dr SC Malhotra, sent me a whatsapp message forwarding a video clip. He has done many audio stories for Vrikshamandir which can be accessed here. Dr Malhotra is a prolific commentator on blogs that are posted on Vrikshamandir. His text message forwarding the videoContinue reading “चिंता, आशा, ममता और मैं”

साधो यह मुर्दों का गाँव

फिर क्या है वह जो मुझे मेरी खुद की आँखों में विशेष बना देता है ? तुलना करूँ तो यही समझ में आता है कि यदि कुछ अलग है मुझमें तो वह है मेरी सही या ग़लत सोच , अनुभूतियाँ और अपनी आँखों में अपनी औक़ात की सही ग़लत पहचान। अंग्रेज़ी मे रंगरेज़ी करें तोContinue reading “साधो यह मुर्दों का गाँव”

Greetings on the occasion of Onam

Some days ago I read a message from a friend on Onam. I don’t know why that social media message posted on the occasion of Onam attracted my unusual attention . I have read it several times and each time I read it touches me deeply. And I then indulge in one of my favouriteContinue reading “Greetings on the occasion of Onam”

Brihadiswara Temple

Indian Art , History , Culture , Architecture and Vedic India Art , Architecture and Culture Thanjavur Brihadiswara Temple : (also called Peryaudayar Kovil Located south of Kaveri , built by Chola King Rajaraja Chola in 1010 AD : however construction : additions , Alterations , and Modifications , went on in bits and piecesContinue reading “Brihadiswara Temple”

अनुभूति – 5

पिछले दो पोस्ट बिल्कुल व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं जो मुझे अंदर से झकझोरती रही है, उसी परिभाषा के शोध की यह अगली कड़ी है। मै हरिद्वार के जिस धर्मशाला में हूं, उसमे करीब तीन सौ आदमियों के रहने की व्यवस्था है। पिछले साल का 20 मार्च का दिन। हमारे साथ करीब दो सौ यात्री। और लाकContinue reading “अनुभूति – 5”

क्या हनुमान ने सूर्य को सचमुच लील लिया था ?

तथाकथित “लिबरल” “सेक्यूलर” “आधुनिक” शिक्षा ने,भारत जैसे देश मे जिसका हज़ारों साल का इतिहास और परंपरा रही है, रैशनल थिंकिंग के नाम पर जुमलेबाजी और परंपरा का उपहास करना तो ख़ूब सिखाया पर कोई आलटर्नेटिव सोच देने मे असमर्थ रही है। फलस्वरूप शाब्दिक अर्थ तथा अपनी सीमित सोच और पुस्तकीय ज्ञान के तथा ”लिबरल” “सेक्यूलर”Continue reading “क्या हनुमान ने सूर्य को सचमुच लील लिया था ?”