Vinod Huria Writes on amendment to NDDB Act; Another view point

All along we have subscribed to the notion, and Dr Kurien was very firm on this, that the job of the Government is governance and not business. We at the NDDB, promoted the cooperative sector as a form of managing business, where the ownership of the enterprise, vested with the major stakeholders (farmer producers). Although,Continue reading “Vinod Huria Writes on amendment to NDDB Act; Another view point”

साधो यह मुर्दों का गाँव

फिर क्या है वह जो मुझे मेरी खुद की आँखों में विशेष बना देता है ? तुलना करूँ तो यही समझ में आता है कि यदि कुछ अलग है मुझमें तो वह है मेरी सही या ग़लत सोच , अनुभूतियाँ और अपनी आँखों में अपनी औक़ात की सही ग़लत पहचान। अंग्रेज़ी मे रंगरेज़ी करें तोContinue reading “साधो यह मुर्दों का गाँव”

परिचय

कुछ शेर पहचान पर साभार रेख्ता से अपनी पहचान भीड़ में खो कर ख़ुद को कमरों में ढूँडते हैं लोग ~शीन साफ़ निज़ाम “इन्सान के इलावा दूसरे जानदारों में भी नाम रखने का रिवाज क्यों नहीं?” “दूसरे जानदारों को डर है कि नामों से पहचान में धोका हो जाता है।” “धोका हो जाता है?” “हाँ,Continue reading “परिचय”