Brihadiswara Temple

Dr. MPG Kurup
Dr. MPG Kurup

Former Executive Director National Dairy Development Board

Indian Art , History , Culture , Architecture and Vedic India

Art , Architecture and Culture

Thanjavur Brihadiswara Temple : (also called Peryaudayar Kovil

Located south of Kaveri , built by Chola King Rajaraja Chola in 1010 AD : however construction : additions , Alterations , and Modifications , went on in bits and pieces for centuries : largest temple in south India , built in 44 Ha of land .

The Temple architecture is complex , Dravidian style , rock cut , Chola Temple style .The temple construction is immersed in mystery , no one including Google or Wikipedia , provide answers.

The Temple tower (Raja Gopuram ) is 216 ft tall and has a huge granite block some 80 mt and 7.7 ft wide , at the very top. No one offers any explanation on how it reached the top.

Prathishta : Lord Shiva , but the Temple has shrines for many of the Gods in the Hindu Pantheon.

The temple and also the city of Thanjavur is famous for its Art and Culture : the classical Indian Dance form “Bharatha Natyam ” originated in Thanjavur !

So also the South Indian Classical Music , popularly known as ” Carnatic Music ” : origin attributed to Music Samrat Thyagaraja !

Source : Text and Pictures : Google / Wikipedia


Rameshwaram

~ Dr MPG Kurup former Executive Director National Dairy Development Board

India : Art , History , Culture , Architecture , Vedic India

History , Culture


Ramanathaswamy Temple : Rameswaram


Sanathana Dharma is commonly referred to as ” Hinduism ” in India , even though the term only refers to the practical and functional aspects of Sanathana Dharma : And Hinduism is the overwhelmingly Hindu !

I am neither a Historian nor an Enthusiast of Sanathana Dharma ! My prime objective in starting these feature posts was to place before the ” am janatha ” , basic information on the enormity of the Levels of achievements of this 5000 years of the unbroken Indian Civilization : Culture , Arts , Architecture , Literature and Spirituality !

Adding to the numbers and size of the Hindus is not part of the ajenda : Sanathana Dharma does not believe in conversions of followers of other faiths to Hindus ! And yet one in seven of all persons on Earth is Hindu !

Ramanathaswamy Temple , located on the Rameswaram Island . The Temple was under the Pandyan Dynasty during the 15th Century , but came under the rule of the Sethupathis , a breakaway group , of the Madurai Nayaks by 1520. AD !Jaffna Kings also contributed to the Temple construction !

The Temple is dedicated to Ramanatha : Shiva : the Jyothirlinga , here , is believed to have been installed and consecrated by Lord Rama himself on his way back from Lanka , for worshipping Shiva and to atone the sins of Brahmahathya for killing Ravana and many others in battle . See Rama Theertha : picture on bottom right , is the Pond Sree Ram used for his daily ablutions !

The Ramanatha Temple had been , over the centuries under the control several dynasties and powers , including the Islamic invader Malik,Kaufer , finally was taken over by the Vijaya Nagara Empire.

Sita Devi is believed to have died in Rameswara . Rama Sethu is identified as the mass of soft sand and floating stones ( Pumice Stones / Lime Stones) from Pampan Island towards the Sea. The Temple architecture is stunning and intricate and has several long corridors with thousands of pillars in them. The third corridor is the longest temple corridors in the world : 197 metres and with 1210 pillars.

Ramanathaswamy Temple is one of the Char Dham Temples and also one of the 12 Jyothirlingas in the Country : the Southern Most.

Source: Google / Wikipedia


क्या हनुमान ने सूर्य को सचमुच लील लिया था ?

जुग सहस्र जोजन पर भानू
लील्यो ताहि मधुर फल जानू

तथाकथित “लिबरल” “सेक्यूलर” “आधुनिक” शिक्षा ने,भारत जैसे देश मे जिसका हज़ारों साल का इतिहास और परंपरा रही है, रैशनल थिंकिंग के नाम पर जुमलेबाजी और परंपरा का उपहास करना तो ख़ूब सिखाया पर कोई आलटर्नेटिव सोच देने मे असमर्थ रही है। फलस्वरूप शाब्दिक अर्थ तथा अपनी सीमित सोच और पुस्तकीय ज्ञान के तथा ”लिबरल” “सेक्यूलर” “आधुनिक” शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित “सुधी जन” किसी भी दूसरी तरह सोचने मे असमर्थ ही नही वरन सोचने का प्रयत्न भी नही करते।

अपने को लिबरल माने वाले वास्तव मे ख़ुद ही कंज़र्वेटिव ( रूढ़िवादी )हैं । यहाँ रॉबर्ट कॉन्क्वेस्ट की राजनीति के तीन नियमों ( https://www.isegoria.net/2008/07/robert-conquests-three-laws-of-politics/) का उल्लेख उचित रहेगा ।

1-हर कोई उस विषय मे में रूढ़िवादी है जो विषय वह जानता है।

2-कोई भी संगठन स्पष्ट रूप से दक्षिणपंथी नही है वह जल्द ही या बाद में वामपंथी बन जाता है।

3- किसी भी नौकरशाही संगठन के व्यवहार की व्याख्या करने का सबसे सरल तरीका यह माना जाता है कि वह अपने दुश्मनों के एक कैबेल ( चालबाज़ गुट) द्वारा नियंत्रित होता है।

वैसे इस बात पर भी विवाद है कि क्या वास्तव में राबर्ट जी ने ही इन नियमों का प्रतिपादन किया था 🤔

https://skeptics.stackexchange.com/questions/38217/did-robert-conquest-ever-state-his-three-laws-of-politics

….कोई प्राथमिक स्रोत नहीं मिल रहा है, सब कुछ स्वयं संदर्भित हो रहा है।

ख़ैर जो भी हो सो हो पर पहला नियम इन अपने को “लिबरल” मानने वालों पर वास्तव मे “रूढ़िवादियों पर पूरी तरह लागू होता है ।

भारतीय परंपरा मे ज्ञान सिर्फ़ किताबी ही नही वरन रूपक, अन्योक्ति, छद्म रूप से भी कहा, सुना और समझा जाता है ।गुरू बाहरी हो अथवा अपने अंदर बैठे गुरू का आह्वान कर हम समझने का प्रयास करते हैं । हिंदू परंपरा किताबी परंपरा नही है। हमारी परंपरा खुला आमंत्रण देती है अन्वेषण कर अपना अर्थ निकालने का ।

इसी लिये हम परंपरागत रूप से अरूढिवादी रहे हैं । आजकल की प्रजातांत्रिक राजनैतिक होड़ मे जो विकृतियाँ हो रही है यदि उनसे हम अपना ध्यान हटा कर देखे तो सही माने मे हिंदू या सनातन सोच ही लिबरल सोच है । तभी तो सभी प्रकार मे मत मतांतरों, दर्शनों को अपने मे समावेश कर यह परंपरा अब भी जीवित है । ऐसे परिवेश मे जब इस परंपरा को नासमझ, उपहास उड़ाने वाले रूढ़िवादी , ब्राह्मणवादी,स्त्रीविरोधी, प्रतिक्रियावादी और न जाने किन किन नामो से पुकारने लगे हैं। हताशा तो इस बात की है कि तथा कथित आधुनिक हिंदू धर्म परंपरा रक्षक भी ऐसा व्यवहार करते है जैसा किताबी धर्मों के कुछ बेवक़ूफ़ अनुयायी !

बताये कौन सा धर्म या परंपरा यह डंके की चोट पर यह कहती है

इदं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् ।

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निम् यमं मातरिश्वानमाहु:।।

ऋग्वेद-1/164/46

अर्थात

एक ही सत् को सत् को जानने वाले ज्ञानी जन इन्द्र, मित्र, वरुण, अग्नि , सुंदर पंख वाले गरुड, यम तथा मातरिश्वा के नाम से पुकारते हैं ।

क्या अन्य मतावलंबी ऐसा कहेंगे। उनका रास्ता उनका ही है या जो अन्य माने उनका । बाक़ी जायें भाड़ मे ।

यदि कोई हनुमान जी की सूर्य को निगलने की बात को पाखंड माने तो ठीक है । जिनकी श्रद्धा है हनुमान जी के प्रति वह तो मानेगा । अब वह या तो शाब्दिक अर्थ लेगा नही तो गहराई मे जायेगा । जो गहराई मे जायेगा वह उसका अर्थ तीसरे प्रकार से से लेगा । दोनो या तीनों ठीक हैं अपनी अपनी दृष्टि से ।

“इस संदर्भ में, सूर्य इस सापेक्ष विश्व-स्वर्ग में सर्वोच्च प्राप्ति का प्रतीक है। साधन दो है सकाम कर्म या प्रवृत्ति मार्ग (कर्म या कर्मों का फल भोगने का मार्ग) या निवृत्ति मार्ग या भीतर की ओर मुड़ने का मार्ग है।

जब आकाश में एक चमकदार फल होने का विश्वास करते हुए, एक बच्चे के रूप में, हनुमान जी सूर्य की ओर बढ़े और उसे निगल लिया, तो आकाश के स्वामी इंद्र ने उसे अपने वज्र ( प्रवृत्ति का बल) से संसार को घोर अंधकार से बचाने के लिए प्रहार किया। इससे हनुमान जी के अभिमान की प्रतीक ठुड्डी टूट गई ।हनुमान यानि जिसकी ठोड़ी टूटी हो !

साधक का ध्यान हनुमान का नाम ही -यानि वह जिनकी ठोड़ी टूटी हुई है – बरबस विनम्रता की ओर ले जाता है । विनम्रता ही भक्त की साधना का वह महान गुण है जो भक्त को मुक्ति के उसके लक्ष्य तक ले जाता है यानि निवृत्ति या अंतर्मुखी होने का मार्ग ।

-स्वामी ज्योतिर्मयानंद की टिप्पणी पर आधारित, “हनुमान चालीसा की गूढ़ व्याख्या”

In this context, the sun is the symbol of the highest attainment in this relative world-Swarga or heaven-the goal of sakamya karma or pravritti marga (the path of enjoying the fruits of one’s karma or actions). When, as a child, Hanuman bounded towards the sun and swallowed it, believing it to be a shining fruit in the sky, Indra, the lord of the heavens, struck him with his thunderbolt (the force of pravritti) to save the world from utter darkness. This broke the chin of Hanuman (symbolic of breaking his pride). Thus, the very name Hanuman (broken chin) beckons the mind of the aspirant to humility, a supreme devotional quality that leads the devotee to the highest goal-that is a desire to follow nivritti marga or the path of turning inward to seek liberation.


हनुमान चालीसा