Tag: समसामयिक
मेरे मित्र मनीष भारतीय ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा “सभी कथित कवियों से माजरत कभी कभी कविताई मुझे मानसिक बीमारी लगती है खासतौर पर जब कोई हर विषय पर चेंप दे” इस संबंध में मनोज झा जी की राज्यसभा में ओम प्रकाश वाल्मीकि जी की कविता पढ़ना क़ाबिले गौर है। झा साहब ने कविता […]
“अनपढ़” बहुत घमंडी है। “पढ़े लिखे” को केवल एक ही बात का घमंड है । वह है “अनपढ़” से ज़्यादा बुद्धिमान होने का। “पढ़ा लिखा अनपढ़” और “अनपढ़ पढ़ा लिखा” कनफुजिआस्टिक स्टेट में विचरण कर रहा है मस्त है !
AI+ यह ब्लाग लगभग संपूर्णत: एआई+ द्वारा लिखा गया है आजकल, इंटरनेट और तकनीकी जमाने में जानकारियाँ आसानी से हमारे पास पहुंचती हैं। हर कोई अपने फोन, कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से जानकारी तक पहुंच सकता है। लेकिन, जानकारी के आधार पर सही समझ बनाना मुश्किल हो रहा है। इसके पीछे कई […]
एक मित्र ने हाल ही में अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर लिखा: “भारत में पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रणाली को तेजी से एकल परिवार द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों को अस्वीकार किया जा रहा है; सांप्रदायिक झगड़े उग्र होते जा रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में, ‘वसुदैव कुटुंबकम‘ की महान भावना को भारत […]
A friend recently wrote on his Facebook timeline: “The traditional joint family system in India is fast being replaced by that of the nuclear family. Inter-caste and inter-religious marriages are being spurned; communal strife is becoming rampant. Against this backdrop, the noble sentiment of ‘Vasudaiva Kutumbakam’ is being waved around or advertised as India’s characteristic. […]
This performance of Nasadiya Sukta at Times Square today reminded me of the days of Bharat Ek Khoj! I remember our first color TV, Shyam Benegal and his team, Manthan, and so many other incidents and movies. During my Anand days, I was privileged to have met Shri Shyam Benegal, Govind Nihalani, and many others […]
किसानी की व्यथा कथा
एक २००८ विडियो क्लिप यहाँ लिंक कर रहा हूँ। फ़ेसबुक पर था । कुछ दिन पहले अचानक मिल गया। यह विडियो उस समय का है जब मैं गाँव अक्सर हर दो तीन महीने में एक बार हो आता था। सोचा था रिटायर होकर वहीं रहूंगा। पर ऐसा हुआ नहीं। कुछ मित्रों का भी कहना था […]
I have not been active on Vrikshamandir for some time. I have not been keeping well. It all started in mid November. One thing led to another. I sent a letter to some friends about my current health condition and also shared a link to a story which I read yesterday and liked most. I […]
रजाई धारी सिंह “दिनभर”
आपने लाख दक्षिण के मंदिर और उत्तर की देव प्रतिमाएं देख डाली हो; हज़ार महलों, मकबरों, मीनारों और अजायबघरों के चक्कर काटे हों, या मुंबई की चौपाटी; दिल्ली के चाँदनी चौक या आगरे के ताजमहल को देखा हो; लेकिन अगर आपने एक बार भी दफ्तर की दुनिया की सैर नहीं की तो समझिये कि आपका […]
जीवन क्षणभंगुर पर अंतहीन !
आज प्रात: भ्रमण पर पत्थरों के बीच यह पौधा दिखाई दिया । फ़ोटो लेने का मन कर गया । पतझड़ में पत्तियाँ लाल हो गई हैं । कुछ दिन बाद गिर जायेगी । फिर बर्फ़ में दब कर वसंत आने पर हरी पत्तियाँ आयेंगी । परिवर्तन और संघर्ष जिजीविषा ..जीवन क्षणभंगुर पर अंतहीन ! कुछ […]
