शून्यता

काल का अट्टहास
होते हुये न होने का अहसास
श्वास नि:श्वास
अनवरत चक्र
जनम बचपन
जवानी ज़रा
जीव का प्रवास
न होते हुये भी होने का अहसास
श्वास नि:श्वास
अनवरत चक्र
क्षण क्षण परिवर्तन
शनै: शनै: क्षरण
जीव का इतिहास
२४ मार्च २०२१

काल का अट्टहास
२४ मार्च २०२१
श्री राम सेतु यह भी तो हो सकता था? और अब भी हो सकता है – प्रस्तुत हैं श्री रश्मि कांत नागर के विचार इससे सहमत होना या न होना आपका अधिकार है। बात पुरानी ज़रूर है, पर इतनी भी नहीं की इस पर चर्चा ना की जाए। विषय है, भारत के पूर्वी और पश्चिमी…
Nagar had shared this article many months ago. He mentions “It could possibly be in 1979”. I wasn’t sure and wanted to confirm. I concede my memory is not good ! Thanks to the Internet , I was able to search this article, published in January 15, 1982 issue of India Today. Thus it is…
तथाकथित “लिबरल” “सेक्यूलर” “आधुनिक” शिक्षा ने,भारत जैसे देश मे जिसका हज़ारों साल का इतिहास और परंपरा रही है, रैशनल थिंकिंग के नाम पर जुमलेबाजी और परंपरा का उपहास करना तो ख़ूब सिखाया पर कोई आलटर्नेटिव सोच देने मे असमर्थ रही है। फलस्वरूप शाब्दिक अर्थ तथा अपनी सीमित सोच और पुस्तकीय ज्ञान के तथा ”लिबरल” “सेक्यूलर”…
परिभाषाओं के पीछे परेशान मैने सुख या खुशी की परिभाषा के लिए एक पोस्ट लिखा था। इस साइट पर देखा तो गुदगुदी हुइ। या यूं कहें कि खुजली हुई। हरिद्वार में हूं, बहुत कुछ देखने को सीखने को मिला। अभी दो दिन पहले एक हजार से ज्यादा युवक, अपना घर, परिवार छोड़ कर नागा पंथ…
We all remember “Guest Programmes” an important activity of at the National Dairy Development Board, Anand. Guest Programmes were designed to expose and brief the guests about the genesis, mandate, programmes and activities of the Dairy Board as well as that of Anand Pattern Milk Cooperatives. One of the most important part of a guest…
यह कहानी जिसे मैं अपनी मां से बचपन मे सुना करता था आज भी याद है! मैंने ये कहानी उनसे पहली बार उस समय सुनी थी, जब मैं कोई पाँच साल का था। उसके बाद ये सिलसिला कोई चार-पाँच वर्ष और चला होगा। पर इस कहानी के बारे में विशेषता ये है, की मैंने ये कहानी हर बार गहरी…
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