Author: MK Sinha

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    डाक्टर कुरियन; एक अभिव्यक्ति

      मेरे जैसै अनेक लोग जो डा कुरियन के सान्निध्य मे आए, मेरी समझ के अनुसार, उनका संबन्ध “विक्रमादित्त्य” और “बैताल” की तरह का है। हर बार उस बैताल के चरित्र के एक पहलू को किसी एक पीपल के पेड़ पर टांग कर आते हैं । वही बैताल एक बिल्कुल नये चरित्र में हमारे कन्धे…

  • अनुभूति -१२

      भला हो इक्कीसवीं सदी का । डाकिया आया, तार वाला आया या पड़ोस में या खुद के घर पर फ़ोन आया वाला जमाना लद गया । अब तो यार, दोस्त, परिवार के लोगों से फ़ोन,इमेल, व्हाटसएप आदि से हम चाहे कहाँ भी हो गाहे-बगाहे ज़रूरत, बे ज़रूरत संपर्क बना रहता है। भाई “एम के”…

  • अनुभूति -११

    भला हो इक्कीसवीं सदी का । डाकिया आया, तार वाला आया या पड़ोस में या खुद के घर पर फ़ोन आया वाला जमाना लद गया । अब तो यार, दोस्त, परिवार के लोगों से फ़ोन,इमेल, व्हाटसएप आदि से हम चाहे कहाँ भी हो गाहे-बगाहे ज़रूरत, बे ज़रूरत संपर्क बना रहता है। भाई “एम के” और…

  • अनुभूति -१०

        ऐसे अनेक, न समझ मे आने वाले दृष्य हर रोज दिखते है, अनुभव करने को मिलते है । अन्दर से कुरेद जाते है। प्रश्न उठाते है। क्या यह ज़िन्दगी से भागे हुए लोग है ? अथवा ज़िन्दगी को समझ पाए लोग ? सुख को समझ गये लोग है दुख को लात मार कर…

  • अनुभूति -9

    हरिद्वार मे जहां मै रहता हू , वह इलाका अभी भी पुराने जमाने मुहल्ले की याद दिलाती है। आधुनिक मकान और होटल तो हैं,सकरी गलियां भी है। छोटी छोटी किराना की दुकानें हैं ।लोग एक दूसरे को पहले नाम से या फलां का बेटा, फलां गली के तीसरे मकान के फलां का भतीजा है के…

  • अनुभूति -7

      ज़िन्दगी किसी की मोहताज़ नही होती। हमारी हर कोशिशों के वावज़ूद, हम जितनी कोशिश करते है, हम ही ज़िन्दगी के मोहताज होते चले जाते है। ज़िन्दगी का विवेक, ज़िन्दगी जीने का शऊर, ज़िन्दगी को समझने का सलीका, ज़िन्दगी के समझने से आती है, समझाने से नही। उसके लिये नही चाहिये कोई डिग्री, कोई कॉलेज,…

  • अनुभूति-6

    किसकी चली है जो मेरी चलेगी !   आज अनायास ही एक बृद्ध महिला मिल गई। पहले न कभी देखा, मिलने की बात तो बहुत दूर। बस गुजर रहा था, और सामने खड़ी दिख गई। बिलकुल सफेद बाल। एक भी दांत नही। पोपला चेहरा। बस देखते ही बोलने लगीं.. मै हरिद्वार मे जहाँ रहता हूं,…

  • अनुभूति – 5

    पिछले दो पोस्ट बिल्कुल व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं जो मुझे अंदर से झकझोरती रही है, उसी परिभाषा के शोध की यह अगली कड़ी है। मै हरिद्वार के जिस धर्मशाला में हूं, उसमे करीब तीन सौ आदमियों के रहने की व्यवस्था है। पिछले साल का 20 मार्च का दिन। हमारे साथ करीब दो सौ यात्री। और लाक…

  • अनुभूति – 4

    परिभाषाओं के पीछे परेशान मैने सुख या खुशी की परिभाषा के लिए एक पोस्ट लिखा था। इस साइट पर देखा तो गुदगुदी हुइ। या यूं कहें कि खुजली हुई। हरिद्वार में हूं, बहुत कुछ देखने को सीखने को मिला। अभी दो दिन पहले एक हजार से ज्यादा युवक, अपना घर, परिवार छोड़ कर नागा पंथ…

  • अनुभूति

      जब मैंने उनसे वृक्ष मंदिर पर लिखने का आग्रह किया तो उत्तर मिला; आप ने मुझे इस प्लैटफार्म पर कुछ लिखने को कहा। मेरा सौभाग्य। बहुत हिचक होती है। और सच पूछिए तो डर लगता है। डर लगता है कि जिस रिश्ते को संजो कर रक्खा है वह सलामत रख पाऊगा कि नही। और…