Author: MK Sinha

  • अनुभूति- 3

    ख़ुशी क्या होती है ? उम्र की  इतनी लम्बी चौड़ी चादर पर जब ज़िन्दगी करवट लेती है, तो हर गलियारे, नुक्कड़, हाइवे, ब्रौडवे, क्रौसरोड पर गुजारे या रुके हुये पल, चेहरे, यादे, और पता नही क्या क्या हरकतें अंगड़ाइयां लेने लगती हैं। कुछ मचलती है, कुछ इठलाती है, कुछ नोक झोंक करती है, कुछ मुंह…

  • |

    परिचय

    कुछ शेर पहचान पर साभार रेख्ता से अपनी पहचान भीड़ में खो कर ख़ुद को कमरों में ढूँडते हैं लोग ~शीन साफ़ निज़ाम “इन्सान के इलावा दूसरे जानदारों में भी नाम रखने का रिवाज क्यों नहीं?” “दूसरे जानदारों को डर है कि नामों से पहचान में धोका हो जाता है।” “धोका हो जाता है?” “हाँ,…

  • आस्था

    इनसान तो एक अजीब नमूना है ही कुदरत का, उसकी आस्था उस से भी अजीब है। आप आस्था की क्या परिभाषा दे सकते हैं? कम से कम मै तो नही दे सकता। जो मै समझ पाया हूं वह यह कि जहां ज्ञान, विज्ञान, विवेक, धर्म सब समाप्त हो जाते हैं, आस्था का प्रस्फुटन होता है।…