Skip to content
Vrikshamandir

Vrikshamandir

  • Audio
  • वृक्षमंदिर हिंदी मे
  • समसामयिक
  • News
  • Uncategorized
  • Reminiscences
  • Culture, Tradition, Human Development and Religion
  • वृक्षमंदिर हिंदी मे
  • Dr V Kurien
  • National Dairy Development Board, NDDB
  • Operation Flood
  • Poetry
  • Dairy Development
  • व्यंग
Vrikshamandir
Vrikshamandir
  • हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गई
    Poetry | Satire

    हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गई

    ByVrikshamandir September 2, 2024May 27, 2025

    हमारे एक बड़े पढ़े लिखे समझदार मित्र हैं। अमरोहा से है। अब डेरा शहर वडोदरा में है। पर वह अमरोहा भूल नहीं पाते। मैं भी आणंद, गुड़गाँव और शहर टोरंटो मे बसर करने के बाद भी बंदुआरी और गोरखपुर भूल नहीं पाता। मेरे दोस्त ने शहर वडोदरा में रहते हुये भी अमरोहा की याद मे…

    Read More हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गईContinue

  • चैट जीपीटी की पहुँच
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | Culture, Tradition, Human Development and Religion

    चैट जीपीटी की पहुँच

    ByVrikshamandir August 26, 2024May 27, 2025

    कुछ महीने हुये कुंवर नारायण जी की कविता पर मैंने एक ब्लाग वृक्षमंदिर पर लिखा था।कालांतर में उसे परिवर्तित और परिमार्जित भी करता रहा। अद्यतन प्रालेख पढ़ने के लिये नीचे दिये इस लिंक पर उँगली दबा कर पहुँचा जा सकता है। पर आज मुझे ख़ुराफ़ात सूझी। मैंने चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन ले रखा है। मैंने…

    Read More चैट जीपीटी की पहुँचContinue

  • Bharat Badal Raha Hai
    Culture, Tradition, Human Development and Religion | Dr V Kurien

    Bharat Badal Raha Hai

    ByVrikshamandir August 25, 2024May 27, 2025

    On the night of August 24, 2024, in Toronto, I was winding down, ready to slip into the comforting embrace of sleep, when a WhatsApp message from Nakshatri, my former colleague at the National Dairy Development Board, jolted me awake. Nakshatri had been part of the Oilseeds and Vegetable Oil wing, a team I had…

    Read More Bharat Badal Raha HaiContinue

  • तारतम्य
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | Culture, Tradition, Human Development and Religion | Reminiscences

    तारतम्य

    ByVrikshamandir August 23, 2024May 27, 2025

    डाक्टर मुकुंद नवरे मैत्री’ के अंक में ‘तारतम्य’ विषय पर लिखने का आवाहन पढकर  मैं सोचने लगा कि कब लिखू, क्योकि लिखने को समय नहीं था। आख़िरकार, मैने फ़ैसला किया कि जब हम न्यू जर्सी जाएंगे तब वहीं बैठकर लिखेंगे। 10 जुलाई को हमारे पास सैन फ्रांसिस्को से रात में रवाना होने वाली और अगली…

    Read More तारतम्यContinue

  • पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखो
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | Culture, Tradition, Human Development and Religion

    पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखो

    ByVrikshamandir August 19, 2024May 24, 2026

    च से चना, च से चम्मच चना हमारे खेत में बुढवा बाबा के जमाने में बोया जाता था। वैसे तो उनके जमाने मे गंजी ( शकरकंदी), मकई और अन्य बहुत तरह की फसलें बोई जाती थीं। गेहूं, धान, सरसों, मटर, तिल, तीसी, आदि के अलावा कोदो, मडुवा आदि की फसल भी होती थी । बुढवा…

    Read More पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखोContinue

  • Human Rights Commissioner of Canada resigns a day before joining
    News and Views

    Human Rights Commissioner of Canada resigns a day before joining

    ByVrikshamandir August 17, 2024May 27, 2025

    I came across a comprehensive report from Justice Canada about the gentleman who was appointed as Canada’s Human Rights Commissioner but resigned just a day before taking office due to the controversy surrounding his nomination. Please click on this link to access the full report. The report is lengthy and detailed, but what caught my…

    Read More Human Rights Commissioner of Canada resigns a day before joiningContinue

  • समसामयिक चर्चा – २
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | समसामयिक | Culture, Tradition, Human Development and Religion

    समसामयिक चर्चा – २

    ByVrikshamandir August 5, 2024May 27, 2025

    कुछ दिन पहले मैने “समसामयिक चर्चा” शीर्षक से एक लेख शृंखला आरंभ करने की घोषणा कर पहली कड़ी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित भी कर दी थी । समय हो और मन करे तो इसे पढ़ने के लिये इस लिंक ( समसामयिक चर्चा- १ ) पर उँगली दबायें । कहते हैं न “प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः” । पहले अंक…

    Read More समसामयिक चर्चा – २Continue

  • श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभार
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | Culture, Tradition, Human Development and Religion | Poetry

    श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभार

    ByVrikshamandir July 31, 2024July 31, 2024

    डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। आजकल बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। लेकिन उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है; वे “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं और अभी भी एक कुशल कंसलटेंट के रूप…

    Read More श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभारContinue

  • I’m Fine मैं ठीक हूँ
    Culture, Tradition, Human Development and Religion | Poetry

    I’m Fine मैं ठीक हूँ

    ByVrikshamandir July 25, 2024July 26, 2024

    इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व…

    Read More I’m Fine मैं ठीक हूँContinue

  • समसामयिक चर्चा – १
    वृक्षमंदिर हिंदी मे | समसामयिक | Culture, Tradition, Human Development and Religion

    समसामयिक चर्चा – १

    ByVrikshamandir July 17, 2024May 27, 2025

    आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ…

    Read More समसामयिक चर्चा – १Continue

  • वसुधैव कुटुंबकम
    Culture, Tradition, Human Development and Religion

    वसुधैव कुटुंबकम

    ByVrikshamandir June 22, 2024May 27, 2025

    दिग्विजय जी कहते हैं कि “मैं हिंदू हूं, मैं धार्मिक हूं ये मेरा नितांत निजी विषय है। अपने धर्म को मानने का तरीका किसी की परेशानी का सबब नही बनना चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना ही हमारे देश की असली पहचान है” ! जब हमने यह बात शिवपालगंज में सनीचर और लंगड से बताई तो…

    Read More वसुधैव कुटुंबकमContinue

  • वृक्षमंदिर हिंदी मे | Culture, Tradition, Human Development and Religion | Reminiscences

    जगन्नाथ काका और “मैं”

    ByVrikshamandir June 21, 2024September 8, 2026

    मेरी परसाई जी से कभी मुलाक़ात न हुई। वह अब न रहे। मैं रह गया। अगर समय से मुलाक़ात हो गई होती परसाई जी अपनी “ निठ्ठले की डायरी” मे जगन्नाथ काका की जगह हो सकता है मेरा नाम लिख देते। क्योंकि मै भी अब जगन्नाथ काका जैसा बन गया हूँ। यदि जीवित रहा तो…

    Read More जगन्नाथ काका और “मैं”Continue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 4 5 6 7 8 … 41 Next PageNext

© 2026 Vrikshamandir - WordPress Theme by Kadence WP

https://www.facebook.com/Vrikshamandir?mibextid=LQQJ4d
Loading Comments...
  • Audio
  • वृक्षमंदिर हिंदी मे
  • समसामयिक
  • News
  • Uncategorized
  • Reminiscences
  • Culture, Tradition, Human Development and Religion
  • वृक्षमंदिर हिंदी मे
  • Dr V Kurien
  • National Dairy Development Board, NDDB
  • Operation Flood
  • Poetry
  • Dairy Development
  • व्यंग