यह लेख अपने आप मे एक लेख नही वरन एक पत्र से निकली सूझ का नतीजा है । पत्र तो लिखा गया। जिसको भेजना था उन्हे भेज भी दिया गया । पर मन मे यह विचार उठा क्यो न उस पत्र को एक लेख मे परिवर्तित किया जाय। जिन आदरणीय महाशय को वह पत्र लिखा […]
यह लेख अपने आप मे एक लेख नही वरन एक पत्र से निकली सूझ का नतीजा है । पत्र तो लिखा गया। जिसको भेजना था उन्हे भेज भी दिया गया । पर मन मे यह विचार उठा क्यो न उस पत्र को एक लेख मे परिवर्तित किया जाय। जिन आदरणीय महाशय को वह पत्र लिखा […]
लकड़हारे की यह पुरानी कहानी तो आपने अवश्य सुनी या पढ़ी होगी। जंगल में गहरी नदी किनारे लकड़ी काटते समय हाथ से फिसल कर उसकी कुल्हाड़ी नदी में जा गिरी। जीवन यापन का एकमात्र साधन खोने से दुःखी लकड़हारा गहन चिंता में डूब कर जब रोने लगा तब उसके सामने जलदेवी प्रकट हुई, उसे पहले सोने, फिर चाँदी की कुल्हाड़ियों का प्रलोभन दिया और अंत में, लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न होकर, उसकी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ सोने चाँदी की कुल्हाड़ियों का पुरस्कार देकर उसे हमेशा के लिए दरिद्रता से बाहर निकाल दिया। लकड़हारे ने अपना शेष सम्पन्न जीवन, सपरिवार संतोष से जिया।
एगो कहानी सुनाते हैं, बात तब की है जब हम ओरिजनल काशी वासी थे। एक इंटरव्यू देने गये थे दिल्ली CSIR में, Senior Research Fellow का । ससुरा बोर्डे में मार कर दिए, वो इसलिए कि एगो वैज्ञानिक महोदय जो इंटरव्यू ले रहे थे उन्होंने ये कह दिया की लेड को प्लंबम नहीं कहते हैं […]
अपने होते कौन है ? कहा जायेगा वह जो हमें अपनायें और जिन्हे हम अपनायें वह हैं अपने। अपनाना क्या है ? हम उन्हीं को अपनाते हैं जिनसे संबंध बन जाये और बने रहें । चाहे घर परिवार के सदस्य, मित्र, अकिंचन अहेतुक जीवन यात्रा में मिल कर साथ चलने फिर भले ही बिछड़ जाने […]
आपने लाख दक्षिण के मंदिर और उत्तर की देव प्रतिमाएं देख डाली हो; हज़ार महलों, मकबरों, मीनारों और अजायबघरों के चक्कर काटे हों, या मुंबई की चौपाटी; दिल्ली के चाँदनी चौक या आगरे के ताजमहल को देखा हो; लेकिन अगर आपने एक बार भी दफ्तर की दुनिया की सैर नहीं की तो समझिये कि आपका […]
आज प्रात: भ्रमण पर पत्थरों के बीच यह पौधा दिखाई दिया । फ़ोटो लेने का मन कर गया । पतझड़ में पत्तियाँ लाल हो गई हैं । कुछ दिन बाद गिर जायेगी । फिर बर्फ़ में दब कर वसंत आने पर हरी पत्तियाँ आयेंगी । परिवर्तन और संघर्ष जिजीविषा ..जीवन क्षणभंगुर पर अंतहीन ! कुछ […]
कथा, एक मित्र के ब्याह की भाग -१ सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी नाट्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने कहा था की, “हर बुद्धिमान महिला को जितनी जल्दी हो सके शादी कर लेनी चाहिये और हर एक बुद्धिमान पुरुष को शादी में जितनी देर हो सके उतनी देर करनी चाहिये”। हमारा मित्र उनके इस कथन से बहुत प्रभावित था। मुझे नहीं पता की जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने स्वयं अपने इस […]
पिछले दो पोस्ट बिल्कुल व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं जो मुझे अंदर से झकझोरती रही है, उसी परिभाषा के शोध की यह अगली कड़ी है। मै हरिद्वार के जिस धर्मशाला में हूं, उसमे करीब तीन सौ आदमियों के रहने की व्यवस्था है। पिछले साल का 20 मार्च का दिन। हमारे साथ करीब दो सौ यात्री। और लाक […]