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वृक्षमंदिर हिंदी मे

कुछ इधर की कुछ उधर की कुछ फिरकी

यह लेख अपने आप मे एक लेख नही वरन एक पत्र से निकली सूझ का नतीजा है । पत्र तो लिखा गया। जिसको भेजना था उन्हे भेज भी दिया गया । पर मन मे यह विचार उठा क्यो न उस पत्र को एक लेख मे परिवर्तित किया जाय। जिन आदरणीय महाशय को वह पत्र लिखा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

कहानी पुरानी लकड़हारे की, संदर्भ नया रश्मिकांत नागर द्वारा !

लकड़हारे की यह पुरानी कहानी तो आपने अवश्य सुनी या पढ़ी होगी। जंगल में गहरी नदी किनारे लकड़ी काटते समय हाथ से फिसल कर उसकी कुल्हाड़ी नदी में जा गिरी। जीवन यापन का एकमात्र साधन खोने से दुःखी लकड़हारा गहन चिंता में डूब कर जब रोने लगा तब उसके सामने जलदेवी प्रकट हुई, उसे पहले सोने, फिर चाँदी की कुल्हाड़ियों का प्रलोभन दिया और अंत में, लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न होकर, उसकी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ सोने चाँदी की कुल्हाड़ियों का पुरस्कार देकर उसे हमेशा के लिए दरिद्रता से बाहर निकाल दिया। लकड़हारे ने अपना शेष सम्पन्न जीवन, सपरिवार संतोष से जिया।

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Reminiscences

बुरा न मानो होली आई और चली गई

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग Satire

रजाई धारी सिंह “दिनभर”

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग Uncategorized

अपूर्व सुंदरी

एगो कहानी सुनाते हैं, बात तब की है जब हम ओरिजनल काशी वासी थे। एक इंटरव्यू देने गये थे दिल्ली CSIR में, Senior Research Fellow का । ससुरा बोर्डे में मार कर दिए, वो इसलिए कि एगो वैज्ञानिक महोदय जो इंटरव्यू ले रहे थे उन्होंने ये कह दिया की लेड को प्लंबम नहीं कहते हैं […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

अपने

अपने होते कौन है ? कहा जायेगा वह जो हमें अपनायें और जिन्हे हम अपनायें वह हैं अपने। अपनाना क्या है ? हम उन्हीं को अपनाते हैं जिनसे संबंध बन जाये और बने रहें । चाहे घर परिवार के सदस्य, मित्र, अकिंचन अहेतुक जीवन यात्रा में मिल कर साथ चलने फिर भले ही बिछड़ जाने […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग

अजब ग़ज़ब दुनिया आफिस और आफिस के बाबुओं की

आपने लाख दक्षिण के मंदिर और उत्तर की देव प्रतिमाएं देख डाली हो; हज़ार महलों, मकबरों, मीनारों और अजायबघरों के चक्कर काटे हों, या मुंबई की चौपाटी; दिल्ली के चाँदनी चौक या आगरे के ताजमहल को देखा हो; लेकिन अगर आपने एक बार भी दफ्तर की दुनिया की सैर नहीं की तो समझिये कि आपका […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

जीवन क्षणभंगुर पर अंतहीन ! 

आज प्रात: भ्रमण पर पत्थरों के बीच यह पौधा दिखाई दिया । फ़ोटो लेने का मन कर गया । पतझड़ में पत्तियाँ लाल हो गई हैं । कुछ दिन बाद गिर जायेगी । फिर बर्फ़ में दब कर वसंत आने पर हरी पत्तियाँ आयेंगी । परिवर्तन और संघर्ष जिजीविषा ..जीवन क्षणभंगुर पर अंतहीन ! कुछ […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion National Dairy Development Board, NDDB Reminiscences

कथा, एक मित्र के ब्याह की भाग १ और २

कथा, एक मित्र के ब्याह की भाग -१ सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी नाट्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने कहा था की, “हर बुद्धिमान महिला को जितनी जल्दी हो सके शादी कर लेनी चाहिये और हर एक बुद्धिमान पुरुष को शादी में जितनी देर हो सके उतनी देर करनी चाहिये”। हमारा मित्र उनके इस कथन से बहुत प्रभावित था। मुझे नहीं पता की जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने स्वयं अपने इस […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Uncategorized

जिंदगी का समंदर

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

अनुभूति – 5

पिछले दो पोस्ट बिल्कुल व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं जो मुझे अंदर से झकझोरती रही है, उसी परिभाषा के शोध की यह अगली कड़ी है। मै हरिद्वार के जिस धर्मशाला में हूं, उसमे करीब तीन सौ आदमियों के रहने की व्यवस्था है। पिछले साल का 20 मार्च का दिन। हमारे साथ करीब दो सौ यात्री। और लाक […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

अनुभूति-2