कुछ महीने हुये कुंवर नारायण जी की कविता पर मैंने एक ब्लाग वृक्षमंदिर पर लिखा था।कालांतर में उसे परिवर्तित और परिमार्जित भी करता रहा। अद्यतन प्रालेख पढ़ने के लिये नीचे दिये इस लिंक पर उँगली दबा कर पहुँचा जा सकता है। पर आज मुझे ख़ुराफ़ात सूझी। मैंने चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन ले रखा है। मैंने […]
