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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

चैट जीपीटी की पहुँच

कुछ महीने हुये कुंवर नारायण जी की कविता पर मैंने एक ब्लाग वृक्षमंदिर पर लिखा था।कालांतर में उसे परिवर्तित और परिमार्जित भी करता रहा। अद्यतन प्रालेख पढ़ने के लिये नीचे दिये इस लिंक पर उँगली दबा कर पहुँचा जा सकता है। पर आज मुझे ख़ुराफ़ात सूझी। मैंने चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन ले रखा है। मैंने […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

तारतम्य

डाक्टर मुकुंद नवरे मैत्री’ के अंक में ‘तारतम्य’ विषय पर लिखने का आवाहन पढकर  मैं सोचने लगा कि कब लिखू, क्योकि लिखने को समय नहीं था। आख़िरकार, मैने फ़ैसला किया कि जब हम न्यू जर्सी जाएंगे तब वहीं बैठकर लिखेंगे। 10 जुलाई को हमारे पास सैन फ्रांसिस्को से रात में रवाना होने वाली और अगली […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखो

च से चना, च से चम्मच चना हमारे खेत में बुढवा बाबा के जमाने में बोया जाता था। वैसे तो उनके जमाने मे गंजी ( शकरकंदी), मकई और अन्य बहुत तरह की फसलें बोई जाती थीं। गेहूं, धान, सरसों, मटर, तिल, तीसी, आदि के अलावा कोदो, मडुवा आदि की फसल भी होती थी । बुढवा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – २

कुछ दिन पहले मैने “समसामयिक चर्चा” शीर्षक से एक लेख शृंखला आरंभ करने की घोषणा कर पहली कड़ी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित भी कर दी थी । समय हो और मन करे तो इसे पढ़ने के लिये इस लिंक ( समसामयिक चर्चा- १ ) पर उँगली दबायें । कहते हैं न “प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः” । पहले अंक […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभार

डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। आजकल बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। लेकिन उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है; वे “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं और अभी भी एक कुशल कंसलटेंट के रूप […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – १

आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

जगन्नाथ काका और “मैं”

मेरी परसाई जी से कभी मुलाक़ात न हुई। वह अब न रहे। मैं रह गया। अगर समय से मुलाक़ात हो गई होती परसाई जी अपनी “ निठ्ठले की डायरी” मे जगन्नाथ काका की जगह हो सकता है मेरा नाम लिख देते। क्योंकि मै भी अब जगन्नाथ काका जैसा बन गया हूँ। यदि जीवित रहा तो […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Story

एक याद; मैं भोला

यह अनायास उभरने वाली यादों में से एक है। जिसकी सारी ज़िंदगी जब संगत दूध वालों कि रही हो, जीवन का बड़ा भाग आनन्द में गुज़ारा हो, दूध अमूल का पिया हो, डॉ कुरियन के साथ काम करने का सौभाग्य मिला हो, तो एक शब्द ज़हन में अवश्य आता है। वह शब्द है, “मंथन”।  मंथन […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

अनर्गल, आशय, प्रकृति और पाखंड

कहते हैं , “जहां न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि “ । अर्थपूर्ण कविता लिखने वाले कवि ने जो जब लिखा होगा उसका अर्थ कवि के मन में क्या रहा होगा यह मेरे जैसे साधारण मानवी के लिये केवल क़यास का विषय है। अपनी समझ को साझा करने का यह प्रयास बस प्रयास भर ही […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे,समय होगा, हम अचानक बीत जाएँगे।*अनर्गल ज़िंदगी ढोते किसी दिन हम,एक आशय तक पहुँच सहसा बहुत थक जाएँगे। मृत्यु होगी खड़ी सम्मुख राह रोके,हम जगेंगे यह विविधता, स्वप्न, खो के।और चलते भीड़ में कंधे रगड़ कर हम,अचानक जा रहे होंगे कहीं सदियों अलग होके। प्रकृति और पाखंड के ये […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Book Review Culture, Tradition, Human Development and Religion

Book Review by Dr Chiranjeev Kohli -2 AN ADMIRABLE POINT by Florence Hazrat

Dr. Chiranjeev Kohli Dr Kohli is a graduate in Mechanical Engineering from Delhi College of Engineering, an MBA from IIM Ahmedabad, and holds a PhD from Indiana University. He is currently a professor of Marketing at California State University, Fullerton, where he has been teaching since 1992. Besides his academic pursuits and teaching, he loves […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग Culture, Tradition, Human Development and Religion

गाय, गोबर और “गोल्ड”

रश्मि कांत नागर गाय, गोबर और “गोल्ड” एक जून को शैलेंद्र ने एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में एक वैज्ञानिक डॉ सत्य प्रकाश वर्मा गाय/ भैंस के गोबर से प्राप्त उन दो उत्पादों के बारे में (२४-२८ मई के दौरान राजकोट हुए किसी मेले में) जानकारी दे रहे है, जिसमे एक किलो गोबर से […]