डाक्टर भीमशंकर मनुबंश बात उन दिनों की है जब मैं बरौनी दुग्ध संघ का प्रबंध निदेशक हुआ करता था । एक रात, कोई बारह बजे के बाद की बात है, अचानक फोन की घंटी बज उठी। उस जमाने मे सिर्फ लैंड – लाइन ही हुआ करता था ।हम लोग कुछ ही समय पहले सोये थे […]
शब्दों का घाल – मेल और उसकी परिणति
