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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

ज़िंदगी का मोल

मनीष भारतीय

मनीष वामपंथी पार्टी के होलटाइमर से राजनीतिक प्रशिक्षक होते हुये सामाजिक कार्यकर्ता के अपने सफ़र में ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत रहे। वर्तमान मे एल्डर केयर फांउंडेशन के संस्थापक हैं।और नित्यं वृध्दोपसेविनः को जीवन का लक्ष्य मान कर नर नारायण की सेवा में लिप्त है।


जिंदगी की दौड़ में कितना भी दौड़ लीजिये जाना खाली हाथ ही है। जो आज साथ हैं कल समाज बन जायेंगे। जिंदगी की इसी जद्दोजहद को लगभग 20-22 साल पहले लखनऊ के शमशान घाट भैंसा कुंड पर किसी परिचित के शवदाह के समय महसूस किया और लिखा था:

वक्त की बिसात पर
जिंदगी का मोल
सात साढ़े सात मीटर कपड़ा
दो किलो राल
किलो दो किलो घी
आठ मन लकड़ी
कुछ प्रणव से आरंभ होते बोल
आस्था की बात है
चंद मुट्ठियाँ रेत भरी
चार हाथ फातिहा
बाइबिल की कुछ लाइने
या किसी नदी का किनारा
कुछ श्रद्धा के फूल
पल दो पल का मेला
कुछ आंखे भरी भरी
शेष समाजिकता

मनीष भारतीय


By Vrikshamandir

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