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वृक्षमंदिर हिंदी मे

मेरा अमरोहा का दोस्त और उसकी फ़नकारी

मैंने एक अमरोहवी दोस्त को लिखा, पेशे ख़िदमत है जौन एलिया के दो शेर, मै भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बसखुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं”चारा साजों की चारा साजी से दर्द बदनाम तो नही होगाहाँ दवा दो पर बतला दो मुझे आराम तो नहीं होगा चारा साज ~ […]