आदमी और मौसम
दोनों जन्म लेते हैं, बढ़ते है
समय के साथ ढलते बदलते हैं
बचपन, लड़कपन, जवानी, अधेडपन फिर बुढ़ापा
सर्दी, गर्मी, बरसात, पतझड़, फिर वसंत
अवस्थायें ही तो है निरंतर बदलते आदमी और मौसम की
दोनो एक जैसे
मर कर फिर जन्म लेते हैं
- Gulab Singh of Bhaukhedi, Sehore
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