तथाकथित “लिबरल” “सेक्यूलर” “आधुनिक” शिक्षा ने,भारत जैसे देश मे जिसका हज़ारों साल का इतिहास और परंपरा रही है, रैशनल थिंकिंग के नाम पर जुमलेबाजी और परंपरा का उपहास करना तो ख़ूब सिखाया पर कोई आलटर्नेटिव सोच देने मे असमर्थ रही है। फलस्वरूप शाब्दिक अर्थ तथा अपनी सीमित सोच और पुस्तकीय ज्ञान के तथा ”लिबरल” “सेक्यूलर” […]
