जीते है मरने के लिये
हर क्षण होते व्यतीत
वर्तमान में धुन भविष्य की
गुनगुनाते पूर्वराग*
होते वर्तमान में अतीत
हुआ वह जिसे चाहा
हुआ वह भी जो न चाहा
मानते है अब होना था जो
आशा और आकांक्षाओं के फेर में
वह ही तो हुआ
*पूर्वराग =Nostalgia
- Gulab Singh of Bhaukhedi, Sehore
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