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  • Janki Sukumaran

    In 1963, while in Science College, Nagpur in our pre-medical batch we had number of girls as classmates rather as many as we boys. During those days talking to a girl was not easy and for me the problem was about speaking in English as having studied in Marathi medium I was learning to cope…

  • अनुभूति -१२

    भला हो इक्कीसवीं सदी का । डाकिया आया, तार वाला आया या पड़ोस में या खुद के घर पर फ़ोन आया वाला जमाना लद गया । अब तो यार, दोस्त, परिवार के लोगों से फ़ोन,इमेल, व्हाटसएप आदि से हम चाहे कहाँ भी हो गाहे-बगाहे ज़रूरत, बे ज़रूरत संपर्क बना रहता है। भाई “एम के” और…

  • अनुभूति -११

    भला हो इक्कीसवीं सदी का । डाकिया आया, तार वाला आया या पड़ोस में या खुद के घर पर फ़ोन आया वाला जमाना लद गया । अब तो यार, दोस्त, परिवार के लोगों से फ़ोन,इमेल, व्हाटसएप आदि से हम चाहे कहाँ भी हो गाहे-बगाहे ज़रूरत, बे ज़रूरत संपर्क बना रहता है। भाई “एम के” और…

  • यादों के झरोखे ~ से सेवानिवृत्त

    कल तक ऑफिसों में अपने कामों की
    डींगे हाँकते थे,
    थोड़े को बढ़ा-चढ़ा कर बखानते थे

    अभी कल की ही बात लगती है,
    बस ये पिछली ही रात लगती है.
    जब ज्वाइन किया था हम सबने,
    एक सपने की सौगात लगती है

  • Fathers Day 2021

    On Father’s Day I had received an email from MK Sinha sharing a message that he had posted on LinkedIn. “आज सुबह, इन्डियन स्टैन्डर्ड टाईम के करीब पांच बजे, जब अपनी रोज की रूटीन के अनुसार , अपने परिचितों, दोस्तों, रिश्तेदारों को मेसेज देने अपना व्हाटसएप खोलो तो  फादर्स डे की शुभकामनाओं के मेसेज भरे पड़े थे। एक अज़ीब सी इन्टेन्स, डिप्रेस्सिव माइन्डब्लाक सिंड्रोम में चला गया। सोचने लगा कि रोज जो मै पितृदेवो भव, मातृ देवो भव कह कर दिन की शुरूआत करता हूं वह कहीं कोई बड़ी भूल तो नही हो गई। कहीं मेरे पिता हम से दूर तो नही हो गए। ये कैसी बिडम्बना है कि इलेक्ट्रॉनिक  माध्यम से लोग मुझे बता रहे है कि मेरा भी कोई बाप, फादर, है और मुझे इस दिन उसे याद करना चाहिए। जैसे बाकी सारी ज़िन्दगी के दिन उस से कोई रिश्ता नहीं । अपने आप को बैकवर्ड समझने लगा। आउट आफ डेट। एक्सपायरी डेट के करीब। लेकिन सही समय पर मेरी आत्मा के एक झंटाटेदार तमाचे ने सही रास्ते पर ला दिया। मेरा बाप, मेरा फादर,  मेरी आत्मा मे हर रोज हर सांस मे मेरे साथ रहता है। कोई याद दिलाए, न दिलाए।” I too have been receiving and forwarding Father’s Day messages both images as well as video clips to friends and…

  • अनुभूति -१०

    ऐसे अनेक, न समझ मे आने वाले दृष्य हर रोज दिखते है, अनुभव करने को मिलते है । अन्दर से कुरेद जाते है। प्रश्न उठाते है। क्या यह ज़िन्दगी से भागे हुए लोग है ? अथवा ज़िन्दगी को समझ पाए लोग ? सुख को समझ गये लोग है दुख को लात मार कर भगा देने…

  • Tayeb Mehta

    India : Art , History , Culture , Architecture , Vedic India Art (Painting) , Culture Born in Kapadavanj , Kheda Dist. Gujarat : 1925 – 2009 , atayen Mehta grew up in Crawford Market area Bombay , among Bohra Community , studied in JJ School of Arts , spent spells of work in New…