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Poetry Satire

खलबली

खलबली अचानक एक दिन मच गई शरीर के तंत्रो मे अजब सी खलबली , हम में से है बडा कौन, इस गंभीर मुद्दे पर अति उग्रता से बहुत बातें चली । सुनो, जीभ बोल पड़ी, “मैं सब से बडी” , “बिना स्वाद सब एक नमकीन हो या रबड़ी”, अन्न नली ने कहा चल हट, तेरा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry Uncategorized

ईशोपनिषद

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National Dairy Development Board, NDDB Poetry Reminiscences

MM Patel remembers

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

अपने

अपने होते कौन है ? कहा जायेगा वह जो हमें अपनायें और जिन्हे हम अपनायें वह हैं अपने। अपनाना क्या है ? हम उन्हीं को अपनाते हैं जिनसे संबंध बन जाये और बने रहें । चाहे घर परिवार के सदस्य, मित्र, अकिंचन अहेतुक जीवन यात्रा में मिल कर साथ चलने फिर भले ही बिछड़ जाने […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

A matter of height

I read this poem by Dr Pradip Khandwala on Facebook. I have attempted a translation in Hindi. I am posting on Vrikshamandir with his permission. डाक्टर प्रदीप खांडवाला की यह मैंने कविता फेसबुक पर पढी और उसका हिंदी में अनुवाद करने का प्रयास किया है, उनकी अनुमति से वृक्षमंदिर पर । A matter of height […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

परिचय

कुछ शेर पहचान पर साभार रेख्ता से अपनी पहचान भीड़ में खो कर ख़ुद को कमरों में ढूँडते हैं लोग ~शीन साफ़ निज़ाम “इन्सान के इलावा दूसरे जानदारों में भी नाम रखने का रिवाज क्यों नहीं?” “दूसरे जानदारों को डर है कि नामों से पहचान में धोका हो जाता है।” “धोका हो जाता है?” “हाँ, […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

मानव संसाधन विकास

अगस्त 1999 में लिखी यह गद्य कविता खो गई थी । बरसों बाद मिली । इसे 2020 नवंबर में वृक्षमंदिर पर प्रकाशित किया गया था । “नीयत” और “नियति“ की कश्मकश की धुँध मे जब ज़िंदगी को कुछ सूझता नहीं, समझ में नहीं आता तब चल पड़ती है ज़िंदगी , “नियति” द्वारा “नियत” किये गये […]