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वृक्षमंदिर हिंदी मे

खुशी, दर्द और वो पुनर्मिलन जिसके बारे में मैं अभी भी सोच रहा हूँ

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के पूर्व कर्मचारियों ने अपना पहला स्नेह मिलन 2015 में आयोजित किया था, दूसरा 2020 में और तीसरा 2023 में। मैं तीनों में शामिल हुआ था। अब वे फिर मिलने वाले हैं—चौथा स्नेह मिलन 7-8 फरवरी 2025 को होने वाला है। कुछ दिन पहले जब मैंने एक पुराने दोस्त से […]

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Dairy Development Reminiscences

डाक्टर मुकुंद नवरे के मूल मराठी लेख का हिंदी अनुवाद “आजकल की बातें”

भैंस कि गाय कि भैंस ? यह घटना इसी वर्ष के सितंबर महीने की है। घर में एक युवक मेहमान दो दिनों के लिए आया था। उसका नाम अजय है। वह कई वर्षों बाद हमारे यहां आया था, विषयों पर गपशप चल रही थी और फिर चूँकि मै डेयरीवाला हूँ , उसने आखिरकार मुझसे दूध […]

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National Dairy Development Board, NDDB Oilseeds and Vegetable Oil Project Reminiscences

एनडीडीबी की तिलहन और तेल परियोजना की अमरीकी लेखा परीक्षा

बात है सन 1980 के दशक के पूर्वार्ध, तब की जब न तो , नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की “धारा” ब्रांड से  भारत के खाद्य तेल बाजार में क्रांति आई थी, न भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एनडीडीबी का एमआईओ (Market intervention Operation)  शुरू हुआ था और इंडियन डेयरी कार्पोरेशन(IDC)  और एनडीडीबी (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Reminiscences

Protected: चतुर बंदुआरी के पिपरेतर के बाबू लोग

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

बीता जीवन स्मृतियों का वन

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Story

मानू अमरोहवी और बंदुआरी के बाबू साहब की हालिया खत-ओ-किताबत

4 March 2025 जनाब अरविंद उर्फ़ मानू अमरोहवी,  मन मे एक बात उठी , बहुत देर से उमड़ घुमड़ रही है । वैसे ही  जैसे पेट में घुड़ घुड़ होती है हवा निकलने के पहले की तरह,  बिलकुल उसी तरह।  बात यह है  कि मन कह रहा है नीचे लिखे को वृक्षमंदिर पर छेंप दूँ […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

बाबू चाचा

आजकल बिरयानी का प्रचलन बढ़ गया है। शहरों में बिरयानियाँ कई प्रकार की मिलने लगीं हैं। जितना बड़ा शहर उतनी प्रकार की बिरयानियाँ ; जैसे वेज बिरयानी, मशरूम बिरयानी, नॉन-वेज बिरयानी, चिकन बिरयानी, मटन बिरयानी, मिक्स बिरयानी, झींगा बिरयानी, अन्डा बिरयानी, हांडी बिरयानी, किलो बिरयानी, बिना प्याज-लहसुन की बिरयानी, मुग़लई बिरयानी, फलाने दुकान की बिरयानी, […] पूरा पढ़ने के लिये नीचे 👇👇दिये गये लिंक पर क्लिक करें https://vrikshamandir.com/2024/09/07/बाबू-चाचा/

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

तारतम्य

डाक्टर मुकुंद नवरे मैत्री’ के अंक में ‘तारतम्य’ विषय पर लिखने का आवाहन पढकर  मैं सोचने लगा कि कब लिखू, क्योकि लिखने को समय नहीं था। आख़िरकार, मैने फ़ैसला किया कि जब हम न्यू जर्सी जाएंगे तब वहीं बैठकर लिखेंगे। 10 जुलाई को हमारे पास सैन फ्रांसिस्को से रात में रवाना होने वाली और अगली […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखो

च से चना, च से चम्मच चना हमारे खेत में बुढवा बाबा के जमाने में बोया जाता था। वैसे तो उनके जमाने मे गंजी ( शकरकंदी), मकई और अन्य बहुत तरह की फसलें बोई जाती थीं। गेहूं, धान, सरसों, मटर, तिल, तीसी, आदि के अलावा कोदो, मडुवा आदि की फसल भी होती थी । बुढवा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – २

कुछ दिन पहले मैने “समसामयिक चर्चा” शीर्षक से एक लेख शृंखला आरंभ करने की घोषणा कर पहली कड़ी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित भी कर दी थी । समय हो और मन करे तो इसे पढ़ने के लिये इस लिंक ( समसामयिक चर्चा- १ ) पर उँगली दबायें । कहते हैं न “प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः” । पहले अंक […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

जगन्नाथ काका और “मैं”

मेरी परसाई जी से कभी मुलाक़ात न हुई। वह अब न रहे। मैं रह गया। अगर समय से मुलाक़ात हो गई होती परसाई जी अपनी “ निठ्ठले की डायरी” मे जगन्नाथ काका की जगह हो सकता है मेरा नाम लिख देते। क्योंकि मै भी अब जगन्नाथ काका जैसा बन गया हूँ। यदि जीवित रहा तो […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Story

एक याद; मैं भोला

यह अनायास उभरने वाली यादों में से एक है। जिसकी सारी ज़िंदगी जब संगत दूध वालों कि रही हो, जीवन का बड़ा भाग आनन्द में गुज़ारा हो, दूध अमूल का पिया हो, डॉ कुरियन के साथ काम करने का सौभाग्य मिला हो, तो एक शब्द ज़हन में अवश्य आता है। वह शब्द है, “मंथन”।  मंथन […]