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Culture, Tradition, Human Development and Religion

बाबू चाचा

आजकल बिरयानी का प्रचलन बढ़ गया है। शहरों में बिरयानियाँ कई प्रकार की मिलने लगीं हैं। जितना बड़ा शहर उतनी प्रकार की बिरयानियाँ ; जैसे वेज बिरयानी, मशरूम बिरयानी, नॉन-वेज बिरयानी, चिकन बिरयानी, मटन बिरयानी, मिक्स बिरयानी, झींगा बिरयानी, अन्डा बिरयानी, हांडी बिरयानी, किलो बिरयानी, बिना प्याज-लहसुन की बिरयानी, मुग़लई बिरयानी, फलाने दुकान की बिरयानी, […] पूरा पढ़ने के लिये नीचे 👇👇दिये गये लिंक पर क्लिक करें https://vrikshamandir.com/2024/09/07/बाबू-चाचा/

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

ज़िंदगी का मोल

मनीष भारतीय मनीष वामपंथी पार्टी के होलटाइमर से राजनीतिक प्रशिक्षक होते हुये सामाजिक कार्यकर्ता के अपने सफ़र में ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत रहे। वर्तमान मे एल्डर केयर फांउंडेशन के संस्थापक हैं।और नित्यं वृध्दोपसेविनः को जीवन का लक्ष्य मान कर नर नारायण की सेवा में लिप्त है।

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

अमरोहा

डियर शैलेन्द्र,  बात बस अमरोहा की हो तो कफ़ील अजर अमरोहवी को याद करना पड़ेगा। उन्होंने फ़रमाया था कि “बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी” ! इंशाअल्लाह  जगजीत सिंह ने इसे दूर तक पहुँचा दिया । क्या गाया कि पूछो मत।खुदा इन सब मौसीकारो और शायरो को जन्नत बख़्शे । मौसीकार शायरी को एक […]

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Poetry Satire

हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गई

हमारे एक बड़े पढ़े लिखे समझदार मित्र हैं। अमरोहा से है। अब डेरा शहर वडोदरा में है। पर वह अमरोहा भूल नहीं पाते। मैं भी आणंद, गुड़गाँव और शहर टोरंटो मे बसर करने के बाद भी बंदुआरी और गोरखपुर भूल नहीं पाता। मेरे दोस्त ने शहर वडोदरा में रहते हुये भी अमरोहा की याद मे […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

चैट जीपीटी की पहुँच

कुछ महीने हुये कुंवर नारायण जी की कविता पर मैंने एक ब्लाग वृक्षमंदिर पर लिखा था।कालांतर में उसे परिवर्तित और परिमार्जित भी करता रहा। अद्यतन प्रालेख पढ़ने के लिये नीचे दिये इस लिंक पर उँगली दबा कर पहुँचा जा सकता है। पर आज मुझे ख़ुराफ़ात सूझी। मैंने चैट जीपीटी का सब्सक्रिप्शन ले रखा है। मैंने […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Dr V Kurien

Bharat Badal Raha Hai

On the night of August 24, 2024, in Toronto, I was winding down, ready to slip into the comforting embrace of sleep, when a WhatsApp message from Nakshatri, my former colleague at the National Dairy Development Board, jolted me awake. Nakshatri had been part of the Oilseeds and Vegetable Oil wing, a team I had […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

तारतम्य

डाक्टर मुकुंद नवरे मैत्री’ के अंक में ‘तारतम्य’ विषय पर लिखने का आवाहन पढकर  मैं सोचने लगा कि कब लिखू, क्योकि लिखने को समय नहीं था। आख़िरकार, मैने फ़ैसला किया कि जब हम न्यू जर्सी जाएंगे तब वहीं बैठकर लिखेंगे। 10 जुलाई को हमारे पास सैन फ्रांसिस्को से रात में रवाना होने वाली और अगली […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion

पंडित जी ने कहा क ख ग घ ङ के बाद च  छ  ज  झ  ञ लिखो

च से चना, च से चम्मच चना हमारे खेत में बुढवा बाबा के जमाने में बोया जाता था। वैसे तो उनके जमाने मे गंजी ( शकरकंदी), मकई और अन्य बहुत तरह की फसलें बोई जाती थीं। गेहूं, धान, सरसों, मटर, तिल, तीसी, आदि के अलावा कोदो, मडुवा आदि की फसल भी होती थी । बुढवा […]

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News and Views

Human Rights Commissioner of Canada resigns a day before joining

I came across a comprehensive report from Justice Canada about the gentleman who was appointed as Canada’s Human Rights Commissioner but resigned just a day before taking office due to the controversy surrounding his nomination. Please click on this link to access the full report. The report is lengthy and detailed, but what caught my […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – २

कुछ दिन पहले मैने “समसामयिक चर्चा” शीर्षक से एक लेख शृंखला आरंभ करने की घोषणा कर पहली कड़ी वृक्षमंदिर पर प्रकाशित भी कर दी थी । समय हो और मन करे तो इसे पढ़ने के लिये इस लिंक ( समसामयिक चर्चा- १ ) पर उँगली दबायें । कहते हैं न “प्रथम ग्रासे मक्षिका पातः” । पहले अंक […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभार

डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। आजकल बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। लेकिन उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है; वे “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं और अभी भी एक कुशल कंसलटेंट के रूप […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

I’m Fine मैं ठीक हूँ

इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व […]