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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

I’m Fine मैं ठीक हूँ

इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – १

आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

वसुधैव कुटुंबकम

दिग्विजय जी कहते हैं कि “मैं हिंदू हूं, मैं धार्मिक हूं ये मेरा नितांत निजी विषय है। अपने धर्म को मानने का तरीका किसी की परेशानी का सबब नही बनना चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना ही हमारे देश की असली पहचान है” ! जब हमने यह बात शिवपालगंज में सनीचर और लंगड से बताई तो […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences

जगन्नाथ काका और “मैं”

मेरी परसाई जी से कभी मुलाक़ात न हुई। वह अब न रहे। मैं रह गया। अगर समय से मुलाक़ात हो गई होती परसाई जी अपनी “ निठ्ठले की डायरी” मे जगन्नाथ काका की जगह हो सकता है मेरा नाम लिख देते। क्योंकि मै भी अब जगन्नाथ काका जैसा बन गया हूँ। यदि जीवित रहा तो […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Story

एक याद; मैं भोला

यह अनायास उभरने वाली यादों में से एक है। जिसकी सारी ज़िंदगी जब संगत दूध वालों कि रही हो, जीवन का बड़ा भाग आनन्द में गुज़ारा हो, दूध अमूल का पिया हो, डॉ कुरियन के साथ काम करने का सौभाग्य मिला हो, तो एक शब्द ज़हन में अवश्य आता है। वह शब्द है, “मंथन”।  मंथन […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

अनर्गल, आशय, प्रकृति और पाखंड

कहते हैं , “जहां न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि “ । अर्थपूर्ण कविता लिखने वाले कवि ने जो जब लिखा होगा उसका अर्थ कवि के मन में क्या रहा होगा यह मेरे जैसे साधारण मानवी के लिये केवल क़यास का विषय है। अपनी समझ को साझा करने का यह प्रयास बस प्रयास भर ही […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे,समय होगा, हम अचानक बीत जाएँगे।*अनर्गल ज़िंदगी ढोते किसी दिन हम,एक आशय तक पहुँच सहसा बहुत थक जाएँगे। मृत्यु होगी खड़ी सम्मुख राह रोके,हम जगेंगे यह विविधता, स्वप्न, खो के।और चलते भीड़ में कंधे रगड़ कर हम,अचानक जा रहे होंगे कहीं सदियों अलग होके। प्रकृति और पाखंड के ये […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

Life has its own “life” ; A nostalgic visit to NDDB Anand in 2008

Approximately 3.8 billion years ago, life made its grand entrance on Earth, marking the beginning of a remarkable journey. This momentous occasion occurred a staggering 0.7 billion years after the formation of our planet. From that point on, life has flourished and evolved, shaping the very fabric of our world. No doubt the life of […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Reminiscences Story

आपबीती और अर्थशास्त्र।

Rashmi Kant Nagar अर्थशास्त्र भी कोई पढ़ता है यार? यानी कोई अपनी मर्ज़ी से इस विषय का चुनाव करे? मेरी समझ में बिरले ही ऐसा करते हैं। ज़्यादातर तो मेरे जैसे होते हैं, जिन पर अकारण या यूँ कहिये, परिस्थितियाँ ऐसे नीरस विषय को थोप देती हैं। सच कह रहा हूँ, मेरे साथ कुछ ऐसा […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

Amazing Amroha of Arvind -1

I met Prof. Arvind Gupta first while I was with the National Dairy Development Board(NDDB). His wife Neela too was an employee at the NDDB. We became colleagues, neighbours and close friends for over four decades.

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व्यंग Culture, Tradition, Human Development and Religion

कलजुग में लोग बड़े बेदर्द , बेमुरव्वत और बेहूदा हो जाते हैं या कलजुग उनसे करवाता है

मेरे मित्र श्री मनीष भारतीय ने लगभग ग्यारह साल पहले 3 नवंबर 2011 को अपनी फ़ेसबुक वाल पर यह मेसेज पोस्ट किया था। बारह साल बीत गये 2023 आते आते अन्ना, केजरी और भूषण अलग थलग हो गये।लोक पाल जी का बिल न जाने कौन से बिलों में घुसता निकलता निकलता 2013 मे पार्लियामेंट मे […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

Gupshup: A Rollercoaster Ride of Memories, Debates, and Insights into Aging

Every Saturday, a group of my seniors and former colleagues, all over the age of 75, gather on Zoom for a free-flowing discussion session that we have affectionately named “Gupshup” (Idle talk). This tradition has been going on for about two years now, and it never fails to bring us joy and laughter, while also […]