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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

An Architect’s Verses

An architect designs buildings and cities. But this one also writes poems about them. This blog shares three poems—straightforward and honest. They mix the sharp edges of city life with the gentle flow of memories. The poems “Whiplash”, “सूनी राहें” and “आओ तो जरा” bring together busy streets, quiet paths, and everyday feelings. I am […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे व्यंग

गुरु जी कहिन

    चेला – गुरू जी बहुतै चिंता हुइ रई है, तबियत भी ठीक नाईं चल रई, कमाई का कोई साधन नही, बैंक में रखे कुछ पैसों के व्याज से घर चल रिया है।सोच सोच कर दम घुटता है। चिंता खाए जा रई है। गुरू- बेटा, चिंता को भुलवाने की कोचिस तो कर के देखो […]

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समसामयिक

मेरी मर्जी

एक नए युग की शुरुआत तब हुई जब सोशल मिडिया जन जन तक पहुँच गया । भारत में अस्सी करोड़ लोगों को पाँच किलो हर महीने सरकारी अन्न दान की अद्भुत घोषणा के पहले ही विश्व में सबसे कम से कम दर पर जनता को इंटरनेट की सुविधा देने वाले देशों में भारत अग्रणी है। […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Story

मुंशी साहब

डाक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है;वह “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं। वह एक कुशल कंसलटेंट के रूप में […]

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Poetry Satire

हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गई

हमारे एक बड़े पढ़े लिखे समझदार मित्र हैं। अमरोहा से है। अब डेरा शहर वडोदरा में है। पर वह अमरोहा भूल नहीं पाते। मैं भी आणंद, गुड़गाँव और शहर टोरंटो मे बसर करने के बाद भी बंदुआरी और गोरखपुर भूल नहीं पाता। मेरे दोस्त ने शहर वडोदरा में रहते हुये भी अमरोहा की याद मे […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

I’m Fine मैं ठीक हूँ

इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे समसामयिक Culture, Tradition, Human Development and Religion

समसामयिक चर्चा – १

आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ तो आरंभ या प्रारंभ कर रहा हूँ। ज्योंही यह पंक्ति लिखी अंदर से भोजपुरी मन बोला “मरदेसामी प्रारंभ नांहीं आरंभ कहल जाला। प्रारंभ तब कहल जाला जब कउनो चीज फिर से सुरू कइल जा।” सुधार आज से एक दैनिक लेख शृंखला का हिंदी में कहूँ […]

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व्यंग Culture, Tradition, Human Development and Religion

कलजुग में लोग बड़े बेदर्द , बेमुरव्वत और बेहूदा हो जाते हैं या कलजुग उनसे करवाता है

मेरे मित्र श्री मनीष भारतीय ने लगभग ग्यारह साल पहले 3 नवंबर 2011 को अपनी फ़ेसबुक वाल पर यह मेसेज पोस्ट किया था। बारह साल बीत गये 2023 आते आते अन्ना, केजरी और भूषण अलग थलग हो गये।लोक पाल जी का बिल न जाने कौन से बिलों में घुसता निकलता निकलता 2013 मे पार्लियामेंट मे […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion

जानकारी की सही समझ: इंटरनेट और तकनीकी जमाने की चुनौती

AI+ यह ब्लाग लगभग संपूर्णत: एआई+ द्वारा लिखा गया है आजकल, इंटरनेट और तकनीकी जमाने में जानकारियाँ आसानी से हमारे पास पहुंचती हैं। हर कोई अपने फोन, कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से जानकारी तक पहुंच सकता है। लेकिन, जानकारी के आधार पर सही समझ बनाना मुश्किल हो रहा है। इसके पीछे कई […]

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Satire

Whatsapp University

WhatsApp now functions in over 180 countries. Only countries that forbid/have imposed restrictions on WhatsApp use are; China, North Korea, Syria, Qatar and the UAE. However, there are ways to unlock WhatsApp and VoIP services in Qatar and other countries as well. The low-cost phone and video call services offered by WhatsApp have been a […]

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Poetry Satire

खलबली

खलबली अचानक एक दिन मच गई शरीर के तंत्रो मे अजब सी खलबली , हम में से है बडा कौन, इस गंभीर मुद्दे पर अति उग्रता से बहुत बातें चली । सुनो, जीभ बोल पड़ी, “मैं सब से बडी” , “बिना स्वाद सब एक नमकीन हो या रबड़ी”, अन्न नली ने कहा चल हट, तेरा […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे

मेरा अमरोहा का दोस्त और उसकी फ़नकारी

मैंने एक अमरोहवी दोस्त को लिखा, पेशे ख़िदमत है जौन एलिया के दो शेर, मै भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बसखुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं”चारा साजों की चारा साजी से दर्द बदनाम तो नही होगाहाँ दवा दो पर बतला दो मुझे आराम तो नहीं होगा चारा साज ~ […]