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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

An Architect’s Verses

An architect designs buildings and cities. But this one also writes poems about them. This blog shares three poems—straightforward and honest. They mix the sharp edges of city life with the gentle flow of memories. The poems “Whiplash”, “सूनी राहें” and “आओ तो जरा” bring together busy streets, quiet paths, and everyday feelings. I am […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Poetry

घुघुआं माना

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Audio Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Story

ग़ज़ल

डाक्टर पी के श्रीवास्तव  संप्रति बंगलूरू निवासी एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक डाक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, “पीके” की पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है; वह “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं जो एक कुशल कंसलटेंट के रूप में अपने ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

बीता जीवन स्मृतियों का वन

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Poetry

शायर पीके की कुछ ग़ज़लें

उम्र के इस पड़ाव पर, “पीके” ने अपने भीतर के कलाकार को भी जगाया है।
शौकिया शायरी और व्यंग्य लेखन में उनकी रुचि ने उन्हें एक
नए आयाम में प्रवेश कराया है।पेश हैं “पीके” के कुछ शेर !

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Poetry Satire

हूक अमरोहा की गोरखपुर को संजीदा कर गई

हमारे एक बड़े पढ़े लिखे समझदार मित्र हैं। अमरोहा से है। अब डेरा शहर वडोदरा में है। पर वह अमरोहा भूल नहीं पाते। मैं भी आणंद, गुड़गाँव और शहर टोरंटो मे बसर करने के बाद भी बंदुआरी और गोरखपुर भूल नहीं पाता। मेरे दोस्त ने शहर वडोदरा में रहते हुये भी अमरोहा की याद मे […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

श्रीवास्तव जी की “बतकही” से साभार

डॉक्टर प्रेम कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें “पीके” के नाम से जाना जाता है, एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक हैं। आजकल बैंगलोर में निवास कर रहे हैं। लेकिन उनकी पहचान केवल एक तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी की नहीं है; वे “डेयरी व्यवसाय गुरु” के रूप में भी जाने जाते हैं और अभी भी एक कुशल कंसलटेंट के रूप […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

I’m Fine मैं ठीक हूँ

इस ब्लाग को लिखने की प्रेरणा मुझे मेरे मित्र और एनडीडीबी के भूतपूर्व कर्तव्यपालक श्री पीटी जेकब (प्रकाश) की एक फ़ेसबुक पोस्ट से मिली । पीटी की पोस्ट की स्क्रीन शाट ऊपर लगी है। यह अंग्रेज़ी कविता दिल को छू गई । पढ़ कर मुझे लगा की सच और झूठ के बीच जीने के द्वंद्व […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

अनर्गल, आशय, प्रकृति और पाखंड

कहते हैं , “जहां न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि “ । अर्थपूर्ण कविता लिखने वाले कवि ने जो जब लिखा होगा उसका अर्थ कवि के मन में क्या रहा होगा यह मेरे जैसे साधारण मानवी के लिये केवल क़यास का विषय है। अपनी समझ को साझा करने का यह प्रयास बस प्रयास भर ही […]

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वृक्षमंदिर हिंदी मे Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry Reminiscences

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे

घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे,समय होगा, हम अचानक बीत जाएँगे।*अनर्गल ज़िंदगी ढोते किसी दिन हम,एक आशय तक पहुँच सहसा बहुत थक जाएँगे। मृत्यु होगी खड़ी सम्मुख राह रोके,हम जगेंगे यह विविधता, स्वप्न, खो के।और चलते भीड़ में कंधे रगड़ कर हम,अचानक जा रहे होंगे कहीं सदियों अलग होके। प्रकृति और पाखंड के ये […]

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Culture, Tradition, Human Development and Religion Poetry

पढ़े लिखे अनपढ़,कुपढ, और सुपढ़

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Poetry Reminiscences

Please Call Me by My True Names

Thanks to my friend Anil Sachdev, I first met Ann Stadler while I was Head of HR in the NDDB. Ann is now in her nineties, and I will be eighty in a couple of years. She is a well-known and highly acclaimed individual. People of my generation would remember the first live program where […]